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योगी के तोहफे से मिले थे 1.50 करोड़, फिर भी जमीन पर पढ़ रहे बच्चे

Ghaziabad Bureau Updated Thu, 13 Sep 2018 12:46 AM IST
योगी ने दिए 1.50 करोड़, फिर भी जमीन पर बैठ पढ़ रहे बच्चे
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बुलंदशहर। जिले के 1748 प्राइमरी स्कूलों में डेस्क-बेंच खरीदने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तोहफे से 1.50 करोड़ रुपये मिले थे। इसके बावजूद अफसरों की लापरवाही से आठ माह बाद भी डेस्क-बेंच नहीं खरीदने से बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। बीएसए का कहना है कि टेंडर हो चुका है। स्कूलों में जल्द ही डेस्क-बेंच पहुंच जाएंगी, लेकिन कब पहुंचेंगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
जिले में परिषदीय स्कूलों की संख्या 2399 है। इनमें से 1748 स्कूल प्राइमरी हैं जिसमें करीब 1.50 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इन बच्चों को सरकार की ओर से निशुल्क शिक्षा, ड्रेस, जूते-जुराब, बैग, स्वेटर और एमडीएम के तहत दोपहर का भोजन दिया जाता है, लेकिन स्कूलों में बच्चे जमीन पर बैठकर ही शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राइमरी स्कूल के बच्चों को डेस्क-बेंच पर बैठकर पढ़ने का तोहफा दिया था। इसके तहत जिले के प्राइमरी स्कूलों में डेस्क-बेंच के लिए 1.50 करोड़ से अधिक की राशि शासन से मिल चुकी हैं। विडंबना है कि आठ माह बाद भी स्कूलों में डेस्क-बेंच नहीं पहुंची है जिससे बच्चे अभी भी जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रशासनिक अफसरों ने विभागीय अफसरों को फटकार लगाते हुए जल्द टेंडर करवाकर स्कूलों में डेस्क-बेंच भेजवाने के आदेश दिए थे। तत्कालीन सीडीओ के साथ मौजूदा सीडीओ ईशा दुहन ने भी बीएसए कार्यालय पहुंचकर टेंडर की प्रक्रिया पूरी करवाने का प्रयास किया था। उसके बाद टेंडर हो गया तो अब तीन माह बाद भी स्कूलों में डेस्क-बेंच नहीं पहुंची।

स्कूलों से टाट-पट्टी भी गायब, राशि भी नहीं हुई जारी
जिले के प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को डेस्क-बेंच तो नहीं मिली साथ ही टाट-पट्टी भी गायब है। इसके लिए शासन और विभाग की ओर से अभी तक राशि भी जारी नहीं की गई। इस कारण बच्चे जमीन पर बैठकर ही शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।

शिक्षक नेताओं ने जताई नाराजगी
उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र यादव और प्राथमिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रांतीय उपाध्यक्ष वेदप्रकाश गौतम ने विभागीय अधिकारियों की अनदेखी पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बीएसए कार्यालय की यह पहली लापरवाही नहीं है। शासन से काफी समय पहले डेस्क-बेंच के लिए राशि मिलने के बावजूद समय पर न तो डेंटर हुआ न ही अभी तक स्कूलों में डेस्क-बेंच पहुंच पाई।

कोट्...
प्राइमरी स्कूलों में डेस्क-बेंच के लिए डेंटर जारी करने में मेरे आने से पहले ही ढील बरती गई थी। मैंने अपनी नियुक्ति के बाद टेंडर की प्रक्रिया को पूरा कर दिया था। यह प्रक्रिया जिला प्रशासनिक अफसरों के दिशा-निर्देश पर की गई थी। टेंडर लेने वाली संस्था ने स्कूलों में डेस्क-बेंच पहुंचाना शुरू कर दिया है। जल्द ही सभी स्कूलों में डेस्क-बेंच पहुंचवाने का प्रयास किया जा रहा है। - अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बुलंदशहर।

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