जिपं के 38 सदस्यों ने पेश किया अविश्वास प्रस्ताव
बुलंदशहर। जिला पंचायत का सिंहासन एक बार फिर से डगमगाने लगा है। जिला पंचायत अध्यक्ष पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए 33 सदस्यों ने एकत्रित होकर डीएम की अनुपस्थिति में एडीएम प्रशासन को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। एडीएम प्रशासन ने सदस्यों को नियमानुसार जांच के बाद हर संभव कार्रवाई का भरोसा दिया है।
एक वर्ष पूर्व सपा समर्थित हरेंद्र यादव जिपं की कुर्सी पर काबिज थे। सत्ता बदलने के बाद कुर्सी के लिए घमासान हुआ और भाजपा के प्रदीप चौधरी ने जिला पंचायत की कमान संभाल ली। अब एक वर्ष बाद दोबारा कुर्सी का खेल शुरू हो गया है। शनिवार को जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ महेन्द्र भैया के नेतृत्व में अविश्वास प्रस्ताव आया तो सत्ताधारी पार्टी में फिर से हलचल मच गई। हालांकि, अविश्वास प्रस्ताव की पटकथा लंबे समय से लिखी जा रही थी, लेकिन नियमानुसार एक वर्ष से पूर्व किसी भी जिपं अध्यक्ष के खिलाफ सदस्य अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकते हैं। जिसके चलते सदस्यों के सामने नियम कानून का बंधन था। गत दिनों जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप चौधरी का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हुआ है। शनिवार को को पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव के समय कुल 33 सदस्य मौजूद रहे थे, जबकि पेश किए गए शपथ पत्र 38 सदस्यों के थे। इस दौरान धर्म सिंह, सोनू लोधी, लक्ष्मण सिंह, विजेता, कलियान, अजय, सुरेन्द्र समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे। वहीं, दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने बताया कि पार्टी का समर्थन उन्हें प्राप्त है। साथ ही जिला पंचायत सदस्यों का संख्या बल भी पर्याप्त मात्रा में है। जांच के बाद स्थिति अपने आप स्पष्ट हो जाएगी।
कोट-
डीएम के वापस लौटने के बाद नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव की जांच के लिए तारीख दी जाएगी। तारीख में अविश्वास साबित होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अरविंद मिश्र, एडीएम प्रशासन
निर्वाचित होने के बाद से ही उठने लगे थे बगावत के सुर
- नियमानुसार एक वर्ष पूर्व नहीं आ सकता था अविश्वास प्रस्ताव
- एक वर्ष पूर्व सपा समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ भी आया था प्रस्ताव
अमर उजाला रब्यूरो
बुलंदशहर। जिला पंचायत अध्यक्ष के तौर पर प्रदीप चौधरी को कुर्सी संभाले एक वर्ष हो चुका है, और अब वह डगमगाने लगी है। हालांकि सदस्यों का कहना है कि निर्वाचित होने के बाद से ही अध्यक्ष ने भेदभाव करना शुरू कर दिया था, लेकिन नियमों के फेर के चलते पहले अविश्वास नहीं लाया जा सकता था।
29 अगस्त 2017 को जिला पंचायत की कुर्सी पर अध्यक्ष के तौर पर प्रदीप चौधरी ने शपथ ली थी। अध्यक्ष की कुर्सी संभालते ही सदस्यों ने प्रदीप चौधरी पर उपेक्षा का आरोप लगाना शुरू कर दिया था। जिसका नतीजा रहा कि पहली तीन बोर्ड बैठकों में जमकर हंगामा हुआ। इससे पूर्व सपा सरकार के दौरान पंचवर्षीय योजना में 1 जनवरी 2016 को सपा समर्थित हरेन्द्र यादव निर्वाचित होकर अध्यक्ष बने थे। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद 4 अप्रैल 2017 को हरेन्द्र यादव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश हुआ था। पूरी जांच पड़ताल के बाद 22 अगस्त को चुनाव हुआ था। जिसमें प्रदीप चौधरी ने विपक्षी नेता महेन्द्र भैया को मात्र एक वोट से शिकस्त दी थी। जिसके बाद 29 अगस्त को प्रदीप चौधरी ने अध्यक्ष के रूप में शपथ ग्रहण की थी।