अब राशन डीलर को बतानी होगी अपनी हैसियत
बुलंदशहर। जनपद के राशन डीलरों को अब अपनी हैसियत बतानी होगी। जो राशन डीलर अपनी हैसियत नहीं बताएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हर वर्ष उनको ब्योरा देना होगा। हकीकत जांचने के लिए ही खाद्य आयुक्त ने सभी पूर्ति अधिकारियों से राशन डीलर्स की हैसियत का ब्योरा तलब कर लिया है। कोटेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले में राशन की 1426 दुकानें हैं। इन दुकानों से फूड सिक्योरिटी योजना के 6.50 लाख परिवारों के 26 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। इन सभी सदस्यों को प्रत्येक माह पांच किलो राशन, जिसमें तीन किलो गेहूं व दो किलो चावल शामिल होता है का वितरण किया जाता है। जनवरी 2016 से शुरू हुई इस योजना के तहत जिले में हर माह लाखों किलो गेहूं दो रुपये और चावल तीन रुपये प्रति किलो की दर से दिए जाने का प्रावधान है। जब से यह योजना शुरू हुई है तब से लेकर अब तक राशन की कालाबाजारी और कम वितरण की शिकायत लगातार जारी हैं। ऐसा नहीं है कि विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई न की गई हो। बावजूद इसके शिकायत मिलने का सिलसिला जारी है। खाद्य आयुक्त आलोक कुमार ने विभाग के पास राशन डीलर की कोई सामाजिक व आर्थिक स्थिति की अधिकृत सूचना न होने का हवाला देते हुए जिला पूर्ति अधिकारियों से एक महीने में समस्त सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। खाद्य आयुक्त ने हर राशन डीलर के लिए एक प्रोफार्मा बनाकर भेजा है। जिसके तहत उसको अपनी हैसियत का विवरण भरकर और शपथ पत्र लगाकर देना होगा। जांच में अगर कोई सूचना गलत मिलती है, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
देना पड़ सकता है आयकर
सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण से परेशान कोटेदारों को चिंता है कि हैसियत का विवरण देने के बाद वे आयकर के दायरे में तो नहीं आ जाएंगे। अभी तक आमदनी का हवाला देकर कोटेदार आयकर अदा नहीं कर रहे थे। इसी प्रकार अपने परिवारों के नाम बेहतर स्थिति होने के बाद भी गरीबी वाला राशन कार्ड पकड़े जाने का भय भी सता रहा है।
रसद एवं खाद्य आयुक्त ने आदेश जारी किया है कि अब राशन डीलर को अपनी हैसियत देनी होगी। इसके लिए एक प्रोफार्मा भी बनाकर भेजा है। इसमें डीलर को अपनी हैसियत का वितरण भरने के साथ शपथ पत्र भी लगाकर देना होगा। इस आदेश का जिले में सख्ती से पालन किया जा रहा है। - केबी सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी, बुलंदशहर।