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चीत्कार में तब्दील हुई भोलेनाथ की ‘जयकार’

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चीत्कार में तब्दील हुई भोलेनाथ की ‘जयकार’
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- हादसे के बाद कांवड़ियों के जत्थे में मची चीख-पुकार
- खौफनाक मंजर देख सिहर रही थी राहगीरों की भी रूह
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। सुबह साढ़े पांच बजे, हरिद्वार से गंगाजल लेकर भोले के रंग में रंगे कांवड़ियों का जत्था गांव मामन खुर्द से भोले की बम के जयकारे लगाते हुए निकला। इस दौरान ग्रामीण भी उनके साथ भोले की जयकार करने लगे, लेकिन चंद कदम की दूरी पर ही भोलेनाथ की यह जयकार चीत्कार में तब्दील हो गई।
सुबह करीब साढ़े पंाच बजे मामन पुल से नीचे उतरते ही अनियंत्रित रोडवेज बस ने कांवड़ियों के जत्थे को रौंद दिया। इस दौरान कांवड़ियों के शव व खून से क्षत-विक्षत शरीर सड़क किनारे पड़े हुए थे। ग्रामीणों ने बताया कि हादसे की जानकारी मिलते ही काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खून से लथपथ घायल कांवड़ियों की मदद के लिए जुट गए। इस बीच सूचना मिलते ही देहात कोतवाली बुलंदशहर पुलिस, खुर्जा देहात पुलिस समेत भारी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गया। हरिद्वार से मध्य प्रदेश के मुरैना गांव के लिए अपने आराध्य का जल लेकर निकला जत्था टूट गया था। दो कांवड़ियों की मौत के बाद साथी कांवड़ियों की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे, लेकिन खुद गंभीर रुप से घायल होने के बावजूद वह एक-दूसरे की चाह कर भी मदद नहीं कर पा रहे थे। पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद मृतकों के शव पोस्टमार्टम को भेज उनके परिजनों को सूचना दी।
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कुछ दिन बाद होता हादसा, तो अलग होता मंजर
- हरिद्वार व गोमुख से कांवड़ लेकर लौट रहे भक्तों की वही टोलियां अभी जिले से गुजर रहीं हैं, जो कि काफी दूर जाने वाले हैं। अगर यह हादसा शिवरात्रि से दो या तीन दिन पूर्व होता तो कांवड़ियों के जत्थों को संभाल पाना पुलिस-प्रशासन के लिए मुश्किल ही साबित होता। उस दौरान नेशनल हाईवे पर जगह जगह कांवड़ियों के शिविर आदि लगे रहते हैं। हजारों की संख्या में कांवड़िए इन दिनों अपने गंतव्य के लिए जा रहे होते हैं। शुक्रवार सुबह हादसे के वक्त केवल एक ही टोली वहां से गुजर रही थी।
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