किसानों ने लिखित में मांगा वेव मिल को चलाने का आदेश
बुलंदशहर। वेव शुगर मिल को बंद करने के बाद अब उसे चलाने के आदेश जारी करने के मामले को लेकर गन्ना उत्पादक किसान असमंजस में हैं। किसानों ने रविवार को गांव बंचावली की गोशाला में बैठक कर मिल चलाने के लिए लिखित में आदेश मांगा, साथ ही निर्णय लिया है कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती तो 11 जुलाई से मिल में किसान धरना-प्रदर्शन पर बैठने को मजबूर होंगे।
किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष संग्राम सिंह ने कहा कि वेव शुगर मिल पिछले दो वर्ष नहीं चली थी। इसे चलाने के लिए विगत वर्ष गन्ना उत्पादक किसानों ने मिल में धरना-प्रदर्शन करते हुए सरकार पर अपनी आवाज पहुंचाने का काम किया था। इसका नतीजा यह रहा कि सरकार की ओर से मिल चलाने का आदेश जारी हुए तो किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। मिल चलने से किसानों की परेशानी भी दूर हो गई। अब मिल प्रबंधन ने शासन को मिल न चलाने को पत्र लिखा और इससे किसान एक बार चिंता में डूब गए, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मिल को चलाने के आदेश जारी हो चुके हैं। इसे लेकर किसान असमंजस में हैं कि मिल चलेगी भी या नहीं। अभी तक मिल चलाने की बात मुंह-जुबानी तक ही सीमित हैं और लिखित में आदेश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में किसानों की परेशानी को देखते हुए समिति ने मिल चलाने के आदेश जारी करने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 11 जुलाई से धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। मौके पर अनिल प्रधान, पप्पू प्रधान, रनबीर और जगबीर प्रधान आदि ने कहा कि मिल बार-बार अपनी भाषा बदल रही है और किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। सचिन भाटी, श्याम पहलवान और संजय प्रधान ने किसानों से कहा कि अब मिल को उसी की भाषा में समझाने का समय आ गया है और इसके लिए किसान एकजुट हो जाएं। बैठक में नरेश निठारी, दुष्यंत सुल्तानपुर, रविंद्र, राहुल, रामवीर, रामवीर शर्मा, जसंवत, जितेंद्र और ओमवीर सिंह आदि शामिल रहे।
अभी मुंह-जुबानी ही हैं मिल चलाने के आदेश
- वर्ष 2010 में सपा के शासनकाल में मात्र 29 करोड़ में बिकी वेव शुगर मिल को प्रबंधन द्वारा बंद करने और अब उसे चालू करने के आदेश अभी तक मात्र मुंह-जुबानी ही हैं। इसका खुलासा जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने किया है। उन्होंने बताया कि अभी शासन से लिखित में कोई ऐसा आदेश नहीं आया है कि मिल को चलाया जाएगा। यह अलग बात है कि गन्ना आयुक्त और शासन स्तर पर मिल प्रबंधन से बातचीत हुई है और मिल को बरकरार चालू रखा जाए। वहीं, दूसरी ओर इससे किसानों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि ऐसा तो नहीं है कि यह आदेश सिर्फ किसानों को आईना दिखाने के लिए तो नहीं हैं। मिल प्रबंधन ने भी अभी लिखित में मिल चलाने के आदेश न जारी होने की बात कही है।