‘जीआईएस’ से दूर होगी स्कूलों की कमी
बुलंदशहर। अमान्य स्कूलों पर अंकुश लगाए जाने के लिए उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। गांव और शहर में राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज खोलने के लिए जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) की मदद ली है। यह सॉफ्टवेयर स्कूल के लिए चिन्हित क्षेत्र की आबादी के साथ स्कूलों को सर्च करेगा। इनपुट के आधार पर ही नए स्कूल खोलने पर सहमति मिलेगी।
जरूरत वाले क्षेत्रों में राजकीय कॉलेज की संख्या कम होने से छात्रों को निजी स्कूलों की ओर रुख करना पड़ता है। इस मजबूरी का फायदा निजी कॉलेज उठाते हैं। इनकी मान्यता है या नहीं, इसकी सही जानकारी छिपा ली जाती है। पोल खुलने के बाद छात्र-छात्राओं का पूरा सत्र खराब होता है। ऐसे स्कूलों को बंद करने के मकसद से उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईटेक तकनीक अपनाई है। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खोले जाने वाले राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेज जीआईएस की रिपोर्ट पर खुलेंगे। गांव व नगर में स्कूलों की कमी को दूर करने का प्रयास सिस्टम करेगा। नए स्कूलों को मान्यता दिए जाने का कार्य भी परिषद इस सॉफ्टवेयर की मदद से करेगा। इतना ही नहीं अब जमीनी हकीकत जानने के बाद ही नए स्कूल खुलेंगे।
ऐसे कार्य करेगा सॉफ्टवेयर
प्रत्येक राजकीय, निजी और एडेड कालेज का यू-डायस कोड होता है। इससे यह पहचान होती है कि कौन सा स्कूल कहां है और किस शैक्षिक बोर्ड का है। किसी क्षेत्र में स्कूल खुलने से पूर्व आसपास संचालित स्कूलों की पहचान यू-डायस से सॉफ्टवेयर करेगा।
जीआइएस साफ्टवेयर से जहां स्कूलों की कमी दूर होगी, वहीं अमान्य स्कूलों की भी आसानी से पहचान होगी। यह हाईटेक तकनीक नए स्कूलों के खुलने में भी मदद करेगी। यह साफ्टवेयर के चलन में आने पर स्कूल अपनी कमी भी नहीं छुपा पाएंगे।
-आरके तिवारी, जिला विद्यालय निरीक्षक।