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आदेश ठेंगे पर, गंदगी से अटे पड़े तालाब

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आदेश ठेंगे पर, नहीं हुई तालाबों की खुदाई-सफाई
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- कूड़ा-कचरा से अटे पड़े हैं जिले के तालाब
- अधिकतर तालाबों में नहीं पहुंचेगा बरसाती पानी, कब्जों की भरमार
- सीडीओ ने दिए थे तालाबों की खुदाई और सफाई के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। मानसून की शुरूआत हो चुकी है और अब तक तालाबों की खुदाई व सफाई काम नहीं हुआ है। तालाब कूड़ा-कचरा और झाड़-झूड़ से अटे पड़े हैं। अधिकतर तालाबों पर कब्जों की भरमार है। ऐसे में तालाबों में बरसाती पानी नहीं पहुंचेगा और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यह समस्या उस स्थिति में है, जबकि सीडीओ ने तालाबों की खुदाई और सफाई के आदेश पूर्व में दिए चुके थे।
जिले में 951 ग्राम पंचायत और 1176 राजस्व गांव हैं। इसके अलावा नौ नगर पालिका परिषद और आठ नगर पंचायतों में जिला मुख्यालय बुलंदशहर भी शामिल है। जिले में 4800 से अधिक तालाब हैं। इनकी पिछले काफी समय से साफ-सफाई नहीं होने के कारण यह कूड़ा-कचरा और झाड़-झूड़ से अटे पड़े हैं। ग्रामीण क्षेत्र की बात करें अधिकतर तालाबों पर कब्जा है। इसके चलते तालाब सिकुड़ गए हैं। स्थिति यह है कि गांव का बरसाती पानी तो दूर की बात, घरों से रोज निकलने वाला पानी भी तालाबों में नहीं पहुंच पाता। सीडीओ ने हाल ही में तालाबों की खुदाई और साफ-सफाई के साथ जीर्णोद्धार के आदेश जारी किए थे। इसके लिए संबंधित विभागों के अफसरों को आवश्यक आदेश भी जारी किए गए। यह निर्णय इसलिए लिया गया कि बारिश का पानी तालाबों में भरकर उसका संचयन किया जा सके। बावजूद इसके मानसून की शुरूआत होने तक मात्र 20 तालाबों की ही साफ-सफाई और खुदाई काम पूरा हो पाया है। ऐसे में समस्या यह है कि बारिश का पानी कैसे तालाबों में भरेगा और संचय होगा।
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अफसरों के अनुसार 105 तालाबों का हो रहा जीर्णोद्धार
अफसरों के मुताबिक जिले में 105 तालाबों का जीर्णोद्धार चल रहा है। इनमें से करीब 20 तालाबों की खुदाई और सफाई का काम पूरा हो गया है। शेष का काम होना बाकी है। उनका यह भी तर्क है कि जिले के शेष तालाबों की पहले सफाई हो चुकी थी, इसलिए अब उनकी सफाई नहीं होगी। जबकि जिले में ऐसा शायद ही कोई तालाब होगा, जिसमें वर्षों से पानी पहुंचा होगा। गांवों के तालाबों पर अवैध कब्जा जारी है।

जेसीबी से हो रही तालाबों की खुदाई व सफाई
सीडीओ ने जिन तालाबों के जीर्णोद्धार के आदेश जारी किए थे, उनकी साफ-सफाई और खुदाई का काम मनरेगा के मजदूरों से करवाने की बात थी, लेकिन इस समय जिन तालाबों पर काम चल रहा है, वहां मनरेगा के मजदूर नहीं दिखाई दे रहे। इसकी पुष्टि पहासू क्षेत्र के गांव बनैल तालाब पर चल रही जेसीबी मशीन कर रही है।

चंद तालाबों का हुआ जीर्णोद्धार, अधिकतर गंदगी से अटे
अहार/दानपुर। क्षेत्र में चंद तालाबों का जीर्णोद्धार हुआ है तो साथ ही अधिकतर गंदगी आदि से अटे पड़े हैं। इतना ही नहीं तालाबों पर अवैध कब्जा है और वह इतने सिकुड़ चुके हैं कि बारिश का पानी एकत्रित नहीं हो सकता। शुक्रवार को पहासू क्षेत्र के गांवों में निरीक्षण के दौरान गांव फजलपुर में तालाब सूखे और गंदगी से अटे मिले। गांव सोही में तालाबों की सफाई का काम ठीक नहीं मिला। गांव बनैल में एक तालाब पर जेसीबी चलती मिली तो शेष गंदगी से अटे पाए गए। दूसरी ओर दानपुर क्षेत्र में गांव सबदलपुर के तालाब गंदगी से अटे मिले। ग्रामीण सोनू आदि ने बताया कि तालाबों की काफी समय से सफाई नहीं हुई है। ग्राम प्रधान मुकेश से भी कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

बरसात सिर पर इंतजाम सिफर
सिकंदराबाद। तहसील क्षेत्र में तालाबों की स्थिति काफी दयनीय है। दो दर्जन से अधिक तालाबों पर जहां अवैध कब्जा है, वहीं शेष तालाबों की सफाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बरसाती पानी एकत्र होने से समस्या पैदा हो सकती है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार तहसील क्षेत्र में करीब 250 तालाब हैं। इन तालाबों में से करीब 29 तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। शेष बचे तालाबों में अधिकांश तालाब गंदगी से अटे हुए हैं। इनमें बरसात का पानी इकट्ठा होने के लिए जगह नहीं बची है। बरसात का मौसम सिर पर है, लेकिन प्रशासन ने तालाबों की कोई सुध नहीं ली। न तो तालाबों को अवैध कब्जा मुक्त कराने का प्रयास किया गया और न ही तालाबों की खुदाई की कोई व्यवस्था की गई। तालाबों की खुदाई नहीं होने से बरसात का पानी एकत्र करने का संकट गहराने लगा है। जलभराव से जहां लोगों को परेशानी से दो चार होना पड़ेगा, वहीं भूजल स्तर में भी गिरावट आएगी। तहसीलदार मलखान सिंह ने कहा कि यदि कही से तालाबों के गंदगी से पटे होने की शिकायत मिलती है तो तालाब की खुदाई कराई जाएगी।
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सीडीओ ने जिले के 105 तालाबों के जीर्णोद्धार के आदेश जारी किए थे। इनमें से करीब 20 तालाबों की सफाई का काम पूरा हो गया है। शेष का काम बाकी है। रही जिले के अन्य तालाबों की बात तो उनकी सफाई पहले हो चुकी है और उनकी साफ-सफाई और जीर्णोद्धार का काम बाद में किया जाएगा। - सर्वेश चंद, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास अभिकरण विभाग
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