अब जैविक खेती से प्रदूषण मुक्त होगी ‘गंगा’
बुलंदशहर। नमामि गंगे योजना के तहत शासन ने गंगा किनारे स्थित गांवों के खेतों में रासायनिक खेती पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। गंगा किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देकर गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की कवायद शुरू की जाएगी। अफसरों का मानना है कि गंगा किनारे रासायनिक खेती से जलीय जंतुओं के साथ ही गंगा के सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
नमामि गंगे मिशन के तहत स्याना, डिबाई, अनूपशहर और ऊचागांव ब्लॉक को शामिल किया गया है। चारों ब्लाकों के गंगा तट पर बसे 39 गांवों में किसान रासायनिक विधि (रासायनिक खाद) से खेतीबाड़ी नहीं कर पाएंगे। किसानों को जैविक विधि से खेती करनी होगी। गंगा किनारे जैविक खेती को बढ़ावा देने का मकसद गंगा में बढ़ते प्रदूषण को कम करना है। जानकारों का मानना है कि फसल उत्पादन में अंधाधुंध रासायनों के इस्तेमाल से गंगा की सेहत बिगड़ रही है। इससे जलीय जंतुओं के जीवन को बढ़ा खतरा पैदा हो गया है। जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। दरअसल जैविक कृृषि उत्पादन सामान्य से अधिक दाम में बेचे जा सकते हैं।
इन गांवों होगी जैविक खेती
अनूपशहर ब्लॉक में अहार बांगर, अकबरपुर उर्फ बच्चीखेड़ा बांगर, आलमपुर बांगर उर्फ तोरिया बांगर, फतेहपुर, हसनपुर बांगर, मोहम्मदपुर बांगर, शेरपुर बांगर और सिरोरा बांगर। डिबाई ब्लॉक में अमरनाथ बाबू उर्फ ऊंचागांव खादर, बदरपुर, भोपतपुर, बिलोना छाप बांगर, ढकनगला, गोकुलपुर खादर, करनवास बांगर, मोहम्मदाबाद उर्फ मीरिया हरिद्वार, नोदेई बांगर, नयाबांस बांगर, निबाड़ी बांगर, निबाड़ी खादर, राजघाट बांगर, रामघाट बांगर, रितु का नगला महाराजपुर, तलबार और उदयगढ़ी बांगर। ब्लॉक स्याना में रबीना कटीरी बांगर और ऊंचागांव ब्लॉक में औरंगाबाद ताहरपुर बांगर, बसी बांगर, चांसी, फरीदा बांगर, मवई और रसूलपुर आदि गांवों में जैविक खेती की शुरूआत होगी।
पॉलेज पर लगेगा पूर्णतया प्रतिबंध
गंगा किनारे अवैध तरीके से बोई जाने वाली पॉलेज पर पूर्णतया प्रतिबंध लगेगा। इसके लिए कृषि विभाग सहित कई विभाग काम करेंगे। अफसरों के अनुसार गंगा किनारे काफी बड़े क्षेत्रफल में पॉलेज बोई जाती है और किसान रासायन खादों का भी प्रयोग करते हैं। इसलिए अब पॉलेज पर पूर्णतया प्रतिबंध रहेगा।
गांवों में लगेंगी जैविक खाद बनाने की यूनिट
उप कृषि निदेशक ने बताया कि गंगा किनारे गांवों में जैविक खेती करवाई जाएगी। वहां प्रत्येक गांव में जैविक खाद बनाने की यूनिट लगाई जाएंगी। भविष्य में गोबर गैस प्लांट भी बनवाने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इससे लाभ यह होगा कि किसान को गोबर की खाद के साथ गोबर से बनने वाली गैस भी मिलेंगी, जिससे उन्हें काफी लाभ मिलेगा।
गंगा में जलीय जीव भी रहेंगे सुरक्षित
सरकारी आंकड़ों के अनुुसार गंगा में मछलियों की 378 और चिडिय़ों की 177 प्रजातियां विचरण करती हैं। इसके अलावा कछुए, 33 डाल्फिन और 500 घड़ियाल आदि जंतु भी हैं। नमामि गंगे मिशन और वन्य जीव संस्थान के संयुक्त प्रयास से गंगा में मछली कछुआ एमीफिबिया समेत अन्य जीवों का संरक्षित किया जाएगा। नरौरा में बाकायदा जलीय जीवों की निगरानी के लिए टीम और सेंटर बना दिए गए हैं।
गंगा किनारे वाले गांवों में जैविक खेती करवाकर गंगा को प्रदूषण मुक्त और अविरल बनाने को रणनीति बना ली गई है। किसानों से संपर्क करना शुरू कर दिया गया है। - आरपी चौधरी, उप कृषि निदेशक, बुलंदशहर