अब लावारिश नहीं होंगे नवजात, ‘पालना’ में होगा स्वागत
बुलंदशहर। लावारिस नवजात शिशुओं की जीवन रक्षा के लिए आखिरकार शासन ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं। अब जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में पालना घर/शिशु स्वागत केंद्र स्थापित किए जाएंगे। पालना घर में कोई भी लावारिश नवजात को असुरक्षित स्थान की जगह यहां छोड़कर जा सकेगा। शासन ने पालना घर स्थापित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
नवजात शिशुओं को आए दिन सड़कों के किनारे, खेतों, नालों में फेंके जाने की घटनाएं प्रकाश में आती रहती हैं। इन घटनाओं को रोकने के लिए शासन ने सरकारी अस्पतालों में पालना घर खोलने का निर्णय लिया है। शासन के आदेशानुसार जिले में इस योजना को लागू करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। पालना घर में लावारिस शिशुओं की देखभाल और लालन-पालन किया जाएगा। ये केंद्र ठीक से काम करे, इसके लिए हर महीने जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में बाहरी सुरक्षित स्थानों पर अनचाहे शिशु को सुरक्षित रखने के लिए पालना लगाए जाएंगे। कोई भी अज्ञात व्यक्ति, महिला, दंपति जो अपनी पहचान सार्वजनिक न करना चाहता हो। नवजात शिशु को पालना से सुरक्षित रखकर वापस जा सकता है। पालना शिशु स्वागत केंद्र पर कर्मचारियों की डयूटी लगाई जाएगी। साथ ही इसका इंचार्ज भी बनाया जाएगा। पालना शिशु केंद्र के इंचार्ज की जवाबदेही होगी कि प्रत्येक दिवस के पालना की गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि रखें। इंचार्ज अधिकारी का नाम और उनका मोबाइल नंबर भी पालना के पास ही दीवार पर मोटे अक्षरों में लिखवाया जाएगा। केंद्र प्रभारी प्रतिदिन की गतिविधि पर नजर रखेगा और पालने में शिशु आने पर इसकी सूचना तुरंत बाल कल्याण समिति या जिला बाल संरक्षण अधिकारी को देगा।
पालने में शिशु रखते ही प्रभारी की बजेगी घंटी
पालनाघर/शिशु स्वागत केंद्र जिस स्थान पर होगा, वहां एक घंटी भी लगाई जाएगी। जिसका संचालन प्रभारी के रूम में होगा। पालने में किसी भी अज्ञात महिला, दंपति या युवक द्वारा शिशु को रखने पर ये घंटी तुरंत बज जाएगी। घंटी बजते ही प्रभारी को पता लग जाएगा कि पालने में शिशु रखा जा चुका है। प्रभारी सबसे पहले नवजात के स्वास्थ्य संबंधी जांच करेगा, शिशु अगर बीमार है तो केंद्र पर शिशु को प्राथमिक उपचार की सुविधा दी जाएगी। यदि शिशु की गंभीर स्थिति होगी तो उसे तुरंत एसएनसीयू केंद्र तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए एंबुलेंस सेवा 102, 108 और 181 महिला हेल्पलाइन के माध्यम से रेस्क्यू वैन का उपयोग भी लिया जाएगा।
प्रमुख सचिव का शासनादेश प्राप्त हो गया है। शासन के आदेश पर जिले के सभी सीएचसी-पीएचसी समेत महिला अस्पताल अधीक्षक को पालनाघर/शिशु स्वागत केंद्र स्थापित करने के लिए निर्देश जारी कर दिया है। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ