आधार से लिंक होगी किसानों की जमीन
- खेतों के दस्तावेज किसानों के आधार नंबर से होंगे लिंक
- जल्द ही किसानों और खेतों का डिजिटल डेटाबेस होगा तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। जल्द ही कृषि भूमि के दस्तावेज आधार से लिंक कर दिए जाएंगे। इसमें किसान और खेतों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके लिए किसानों के आधार नंबर और खेतों की जानकारी को आपस में जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके जरिये किस किसान के पास देश में कहां और कितनी जमीन है का पता आसानी से चल जाएगा। साथ ही खेतों की बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी और फसल बीमा के तहत मुआवजा मिलने में भी आसानी होगी। सरकार हर खेत की यूनिक आइडी बनाकर उसके नंबर को किसान के आधार नंबर से लिंक कराएगी।
केंद्र सरकार ने इस योजना को पूरा करने के लिए साल 2019 तक का लक्ष्य रखा है। इस अवधि तक सभी किसानों के खेतों के दस्तावेजों को उनके आधार से लिंक करा दिया जाएगा। सरकार पहले सभी जिलों में खेती की लोकल गवर्नमेंट डायरेक्ट्री (एलजीडी) तैयार कराएगी। फिर इस सूची के आधार पर उनके खेतों का डाटा आधार से लिंक किया जाएगा। अभी कई ऐसे मामले आते हैं जिसमें किसी दूसरे के खेत को कागजों में हेराफेरी कर बेच दिया जाता है। खेतों की यूनिक आइडी और किसान के आधार नंबर की बायोमीट्रिक डिटेल आपस में जुड़ जाने से फर्जीवाड़ा नहीं होगा। वहीं फसल का नुकसान होने पर फसल बीमा योजना का लाभ भी संबंधित किसान को आसानी से मिल जाएगा। बताया जा रहा है कि एलजीडी से किसान का आधार नंबर व बायोमीट्रिक डिटेल आपस में लिंक होगी। इसमें कुछ ऐसा होगा कि अगर किसी किसान का एक खेत बुलंदशहर में में है और उसी का दूसरा खेत किसी दूसरे राज्य के जिले में में है। ऐसे में बुलंदशहर के उस किसान के खेत का यूनिक आइडी व आधार नंबर उप्र सरकार दर्ज कराएगी और यही जानकारियां दूसरे राज्य के जिले में भी दर्ज कराई जाएंगी। इसके बाद किसी भी किसान के एलजीडी व आधार नंबर को देश के किसी भी जिले में विभागीय सॉफ्टवेयर में डालने से पता चल जाएगा कि उसके पास किस राज्य में कहां और कितने खेत हैं साथ ही उनका आकार कितना है। इतना ही नहीं खतौनी के आधार पर हर खेत का अलग कोड होगा। सरकार ने सभी खेतों की एक यूनिक आइडी बनाने की तैयारी की है। इस आइडी में जिला, तहसील, ब्लॉक, गांव का खसरा व खेत का अलग-अलग कोड और नंबर बनाया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी अश्वनी कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की इस पहल से किसानों के खेतों की बिक्री में होने वाले फर्जीवाड़ों पर लगाम लगेगी और फसल बीमा के तहत मुआवजा मिलने में भी आसानी होगी। कागजों में हेराफेरी कर कोई किसी दूसरे किसान की जमीन नहीं बेच पाएगा। कुल मिलाकर किसानों को फायदा होगा। सरकार की यह अच्छी पहल है।