गांव ओडीएफ घोषित, लेकिन खुले में शौच जा रहे ग्रामीण
- विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयास हो रहे विफल
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
जिले में शौचालय बनाकर गांवों को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) तो कर दिया गया, लेकिन अधिकतर गांवों में अब भी ग्रामीण खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। ग्रामीणों की लौटा परेड को रोकने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयास भी विफल साबित हो रहे हैं।
जिले में स्वच्छ भारत ग्रामीण के तहत शौचालय बनाकर गांवों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने का काम जारी है। लोगों में जागरूकता लाने के लिए दो साल से लगातार प्रयास जारी हैं और रैली, नाटक और बैठक आदि कार्यक्रम किए गए। हालांकि यह कार्यक्रम इस समय नहीं चल रहे हैं। मगर, स्वच्छाग्राही, समाजसेवी और गांवाें के गणमान्य लोगों के साथ प्रशासनिक अफसर लगातार लोगों को खुले में शौच न जाने की प्रेरणा देकर उन्हें होने वाले नुकसान से भी अवगत करवा रहे हैं।
जिले में अब तक 1.55 लाख के सापेक्ष 80 हजार शौचालयों का निर्माण हो चुका है। जिले की 951 ग्राम पंचायतों में से 304 ग्राम पंचायत और 1176 राजस्व गांवों में से 421 गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं। गुलावठी ब्लॉक को भी ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए शासन से दो अक्टूबर तक का समय मिला है, लेकिन ओडीएफ घोषित हो चुके अधिकतर गांवों में लोटा परेड जारी है। खुले में शौच जाने वालाें में अधिकतर लोग बुजुर्ग शामिल हैं। उन्हें जब शौचालय का प्रयोग करने के लिए कहा जाता है तो उनका तर्क होता है कि उन्हें शौचालय की आदत नहीं है। इस तरह की शिकायत भी विभाग को मिल रही हैं।
उधर, जिला पंचायत राज अधिकारी अमरजीत सिंह का कहना है कि जल्द ही ओडीएफ घोषित हो चुके गांवों में एक बार फिर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।