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ठप पड़ा शहर का विकास, बजट के लिए बंधी हैं आस

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ठप पड़ा शहर का विकास, बजट के लिए बंधी है आस
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- नगर पालिका बोर्ड बैठक में पास हुए प्रस्तावों पर अब तक शुरू नहीं हुआ कार्य
- अफसरों ने विकास कार्य के लिए शासन को भेजे आठ करोड़ के प्रस्ताव
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर।
बजट के अभाव में शहर का विकास पूरी तरह से ठप पड़ा है। आलम यह है कि नगर पालिका की बोर्ड बैठक में पास हुए प्रस्तावों पर भी अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। गत दिनों शासन द्वारा नगर पालिका के मासिक बजट में से की गई कटौती अब नगर पालिका अफसरों को चुभने लगी है। यदि शासन द्वारा यह कटौती नहीं की जाती तो शहर में धीमी रफ्तार से ही सही, लेकिन विकास चलता रहता।
नगर पालिका की बोर्ड बैठक में विकास कार्यों के लिए आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव पास हुआ था। इनमें कालोनियों में जर्जर सड़कों की मरम्मत, नाला, सड़क निर्माण समेत करोड़ों रुपये के प्रस्तावों पर सभासदों ने मोहर लगाई थी। बोर्ड बैठक में प्रस्तावों पर मोहर लगी तो लोग भी सुविधा मिलने का इंतजार करने लगे। लोगों का इंतजार लंबा खिंचता गया और दो बोर्ड बैठक के बाद भी अब तक शहर में विकास के नाम पर कोई भी कार्य शुरू नहीं हो सका है। गत माह की बोर्ड बैठक में सभी 37 वार्डों की कालोनियों की जर्जर सड़कों की मरम्मत के लिए भी 32 लाख रुपये के प्रस्ताव पास किए गए थे, लेकिन प्रस्ताव पास कर केवल फाइलों में दबकर रह गए। सड़कों की जर्जर हालत में सुधार न होने से परेशान लोग अब नगर पालिका को शिकायत भेज रहे हैं। अफसर भी शिकायतकर्ताओं से बजट की कमी का रोना रोकर शिकायतों का निस्तारण जल्द करने की बात कह रहे हैं।
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बोर्ड बैठकों में पास हुए मुख्य प्रस्ताव
- 37 वार्डों की जर्जर सड़कों की मरम्मत
- पूरे शहर में सोडियम लाइट के स्थान पर एलईडी लाइटें लगाना
- शहरी क्षेत्र से बंदर व आवारा कुत्तों को पकड़ना
- खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत कराना

शासन को भेजा आठ करोड़ का प्रस्ताव
फंड की कमी से जूझ रही नगर पालिका के अफसरों ने शासन को आठ करोड़ का प्रस्ताव भेजकर बजट उपलब्ध कराने की मांग की है। पालिका अफसरों के अनुसार पालिका के पास अपने खर्च काटकर इतनी धनराशि भी शेष नहीं बच रही है कि वह कहीं कोई विकास कार्य करवा सके।

62 लाख प्रतिमाह की कटौती बनी वजह
शासन द्वारा गत वर्ष में नगर पालिका के मासिक बजट से 62 लाख रुपये की बड़ी कटौती कर दी थी। इससे पालिका को मिलने वाला करीब दो करोड़ का बजट डेढ़ करोड़ से भी कम हो गया। ऐसे में नगर पालिका मासिक बजट से केवल अपने खर्चे चलाने में ही समर्थ दिख रही है।
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कोट-
बजट की कमी के कारण शहर में विकास कार्य की रफ्तार लगभग थम सी गई है। शासन को आठ करोड़ के प्रस्ताव बनाकर बजट उपलब्ध कराने के लिए भेजे हैं। बजट मिलते ही विकास कार्य कराए जाएंगे। - एके सिंह, ईओ नगर पालिका
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