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धर्म की रक्षा में खड़े जब वो अचानक हो गए...

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‘धर्म की रक्षा में खड़े जब वो अचानक हो गए...’
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- महर्षि दयानंद बोधोत्सव पर हुआ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
कवि डॉ. आलोक बेजान ने ‘धर्म रक्षा में खड़े जब वो अचानक हो गए, मान इतना बढ़ गया कि स्वयं मानव हो गए, जब तलक दुनिया रहेगी, सब याद रखेंगे उन्हें, कथ्य से बढ़कर दयानंद जब कथानक हो गए’ कविता पढ़ी तो महफिल वाह-वाह कह उठी। मौका था महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर महर्षि दयानंद बोधोत्सव पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। महर्षि दयानंद सभागार में आर्य समाज चौक बाजार के तत्वावधान में सम्मेलन आयोजित किया गया।
कवि सम्मेलन में धर्मेश अविचल फरीदाबाद ने ‘तुष्टिकरण की राजनीति से दुष्ट सहारा पा जाते हैं, मानवता पर दानवता के बादल छा जाते हैं’ कविता पढ़ी। स्वदेश यादव गाजियाबाद ने ‘चारों ओर अंधकार छूट की चली बयार, ज्ञानवाली रोशनी दिखाई दयानंद ने’, अनूप शर्मा ध्रुव ने ‘सुनाई थी जो अम्मा ने कहानी याद रहती है, हमें बातें बुजुर्गों की सयानी याद रहती हैं।’ इसी तरह कवि राजकुमार सिसौदिया धौलाना, सुल्तान सिंह सुल्तान मेरठ और आर्य समाज के मंत्री शैलेंद्र जौहरी सत्यव्रत ने भी सत्यपाल पथिक की रचना पढ़ी। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ आर्य समाजी एवं चिंतक शांति शरण राठी ने की। इस दौरान प्रधान संजीव रामा, अध्यक्ष गणेशदत्त गोयल, प्रबंधक संतोष राघव, कोषाध्यक्ष राजेश गोयल, अनिल आर्य, सुशील शर्मा, शिव कुमार आर्य, शरद गोयल और आचार्य अनुराग आदि शामिल रहे।
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धूमधाम से मनाया गया ऋषि बोधोत्सव
पहासू। आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का ऋषि बोधोत्सव धूमधाम से मनाया गया। आर्य समाज के लोगों ने यज्ञ-हवन से पूर्व कस्बे में प्रभातफेरी निकाली। बताया जाता है कि बालपन में स्वामी दयानंद सरस्वती ने महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखकर पूजा अर्चना की थी। रात में शिवलिंग पर चढ़े फल-मेवे को खाने काफी चूहे पहुंच गए। उन्हें देखकर स्वामी दयानंद ने सोचा कि ईश्वर अगर सर्वशक्तिमान है तो चूहों को क्यों नहीं भगाता। उसी समय उन्हें बोध हुआ और वह ईश्वर की तलाश में निकल गए। ऐसे में आज के दिन यानि महाशिवरात्रि को आर्य समाज के लोग बोधोत्सव दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दौरान आर्यसमाज के लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। महीपाल सिंह, रनवीर सिंह, वेदप्रकाश गर्ग, विनोद आर्य, सोमी गुप्ता आदि रहे। ब्यूरो
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