अफसरों की उदासीनता से आंसू बहा रहा नेत्र चिकित्सालय
बुलंदशहर। एक ओर तो सरकार जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए प्रस्ताव मांग रही है, लेकिन दूसरी ओर जिले में लंबे समय से बंद पड़े नेत्र चिकित्सालयों को अधिकारियों की उदासीनता झेलनी पड़ रही है। कई बार शासन द्वारा प्रस्ताव मांगे जाने के बाद भी अभी तक अधिकारियों ने इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
शहर के बीचों बीच स्थित मोती बाग में करीब 11 बीघा जमीन पर सेठ गोपीमल नेत्र चिकित्सालय बना है। उस समय अस्पताल को अलीगढ़ के अस्पताल से संबद्घ किया गया था। इसके बाद जिले में स्थानीय समिति बनाकर अस्पताल का संचालन शुरू किया गया। फंड की कमी के कारण अस्पताल दिन प्रतिदिन ठप होता चला गया। वर्ष 2009 में अस्पताल की दशा को सुधारने के लिए तत्कालीन डीएम शशि भूषण लाल सुशील ने इस नेत्र चिकित्सालय को जिला अस्पताल के अधीन करने का कदम उठाया। उन्होंने प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर सेठ गोपीमल नेत्र चिकित्सालय को जिला अस्पताल के अधीन करने कर मांग की थी। इसके बाद करीब आधा दर्जन पत्रावलियां भी शासन को भेजी गई, लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण इस यह नेत्र चिकित्सालय आंसू बहा रहा है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. केएन तिवारी का कहना है कि अस्पताल को समायोजित करने के विषय में मुझे जानकारी नहीं है। यदि शासन से इस संबंध में कोई प्रस्ताव मांगा जाएगा तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।