किसानों की झोली भरेंगी विदेशी गेहूं की फसल
- विदेशी गेहूं की 40 किस्मों का ट्रायल शुरू
- कृषि विज्ञान केंद्र में गेहूं की फसलों के अच्छे परिणाम को लेकर वैज्ञानिक गदगद
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। विदेशी गेहूं की 40 किस्मों का ट्रायल शुरू हो गया है। सरदार बल्लभभाई पटेल कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय कार्यालय कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदाहर में अच्छे परिणाम को लेकर वैज्ञानिक गदगद हैं।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में पहल कर रही है। इसी उद्देश्य को लेकर गेहूं की प्रजातियों पर काम करने वाली मैक्सिको की संस्था सीमिट के सहयोग से विदेशी गेहूं से किसानों की झोली भरने के लिए 40 विदेशी गेहूं की किस्मों को वैज्ञानिकों ने ट्रायल के लिए लाया गया है। इन सभी किस्मों का कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल शुरू हो गया है। कृषि विज्ञान केंद्र के रिसर्च स्टेशन इंचार्ज डॉ. शिव सिंह ने बताया कि इन विदेशी किस्मों का ट्रायल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आवोहवा में अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। इन किस्मों की खास बात यह है कि इनकी पैदावार भी देश में अब तक बोई जा रही गेहूं की किस्मों से अच्छी होने की संभावना है। ट्रायल के तौर पर बोई गई इन किस्मों के सार्थक परिणाम सामने आने से यह साफ हो गया है कि इनकी बिजाई कर किसानों की झोली भरेगी। फसल में रोग लगने की भी संभावना कम होगी। पैदावार अच्छी होने पर खाद्यान्न में भी बढ़ोतरी होगी। इनका बीज किसानों तक पहुंचाने में अभी दो से तीन साल का समय लग सकता है।
अब जनवरी में भी होगी गेहूं की बुआई
बुलंदशहर। अब वह दिन दूर नहीं, जब जनवरी महीने में भी गेहूं की बुआई होगी। जनवरी में बोई जाने वाली गेहूं की 10 किस्मों का ट्रायल शुरू हो गया है। इन किस्मों से जहां भरपूर पैदावार मिलेगी, वहीं गन्ना उत्पादक किसान भी देरी से गेहूं की बुआई कर सकेंगे।
गेहूं की बुआई नवंबर माह से शुरू होकर दिसंबर तक पूरी कर ली जाती है। इसके बाद अभी तक ऐसी कोई गेहूं की किस्म नहीं थी, जो जनवरी महीने में भी बोई जा सके। ऐसी किस्म न होने के कारण गन्ना उत्पादक किसान देरी से खेत खाली होने के कारण गेहूं की बुआई से वंचित रह जाते हैं। मगर, अब ऐसा नहीं होगा और वैज्ञानिकों ने ऐसी गेहूं की 10 नई किस्मों का ट्रायल शुरू कर दिया है। यह नई किस्म बुलंदशहर स्थित सरदार बल्लभभाई पटेल अनुसंधान केंद्र के परिक्षेत्र कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर में ट्रायल के लिए पहुंच गई हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के इंचार्ज रिसर्च स्टेशन डॉ. शिव सिंह और कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज ने बताया कि जनवरी में बोई जाने वाली गेहूं की नई किस्म भरपूर पैदावार देंगी और इसका सबसे अधिक फायदा उन किसानों को मिलेगा, जो गन्ने का खेत समय पर खाली नहीं होने से गेहूं की बुआई से वंचित रह जाते हैं।