अब सिर्फ एक ही पानी में लहराएगी गेहूं की फसल
- घटते भूजल को देख वैज्ञानिकों ने विकसित की गेहूं की नई 10 किस्म, ट्रायल शुरू
- बंपर पैदावार के साथ रोग लगने की आशंका भी होगी कम
- डीएपी और यूरिया का इस्तेमाल होगा कम, जैविक उर्वरक से मिलेगा लाभ
मनोज चौधरी
बुलंदशहर।
किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। अब गेहूं की फसल एक पानी में ही तैयार हो जाएगी। घटते भूजल स्तर को देखते हुए वैज्ञानिकों ने गेहूं की 10 ऐसी किस्में विकसित की हैं जिनमें सिंचाई की जरूरत कम होगी। मेहनत कम होने के साथ ही इसमें डीएपी व यूरिया की खपत भी कम होगी। बंपर पैदावार के साथ फसल में रोग लगने की आशंका कम हो जाएगी।
कई वर्षों की मेहनत के बाद गेहूं अनुसंधान निदेशालय, करनाल से गेहूं की यह प्रजातियां बुलंदशहर स्थित सरदार बल्लभभाई पटेल अनुसंधान केंद्र के परिक्षेत्र कृषि विज्ञान केंद्र में ट्रायल के लिए लाई गई हैं। इन सभी किस्मों को ट्रायल के तौर पर केंद्र में उगाया जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसे लेकर केंद्र के वैज्ञानिकों में उत्साह है। उनका दावा है कि यह किस्में देशभर के गेहूं किसानों को मालामाल कर देंगी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन किस्मों का बीज अभी किसानों को मिलने में दो से तीन साल का समय लग सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी इंचार्ज रिसर्च स्टेशन डॉ. शिव सिंह और कृषि वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज ने बताया कि एक ही पानी में उगाई जाने वाली 10 किस्मों का ट्रायल सफल साबित हो रहा है। अभी इन किस्मों को नाम नहीं दिए गए हैं, लेकिन जल्द ही इनको नाम भी मिल जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन किस्मों के उगाने पर किसानों की मेहनत कम होगी और पानी की भी बचत होगी। यदि बारिश हो गई तो किसानों को पानी लगाने के झंझट से भी मुक्ति मिल जाएगी। यह किस्म जहां किसानों को मालामाल करेंगी, वहीं घटते भूजल स्तर को भी बचाने में सहायक सिद्ध होंगी।