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लिंगानुपात में हुआ सुधार, पर अभी भी है बेटियों की कमी

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लिंगानुपात में सुधार, पर अब भी है बेटियों की कमी
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- वर्तमान में एक हजार बेटों पर मात्र 902 बेटियां
- गत वर्ष के सापेक्ष 38 प्रति हजार बढ़ीं बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। लिंगानुपात में जिले की स्थिति अब भी खराब है। इसे सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चला हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए आंकड़ों के अनुसार जिले ने विगत वर्ष के अनुपात में छलांग लगाते हुए बढ़त बनाई है। बावजूद इसके अब भी बेटियां की संख्या काफी कम है।
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बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के बाद भी जिले में बालिकाओं की कमी बरकरार है। लिंगानुपात में सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी भी बेटा व बेटियों की संख्या में बड़ा अंतर है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सर्वाधिक लिंगानुपात के मामले में बुलंदशहर पड़ोसी जनपदों को भी मात दे रहा है। लिंगानुपात में बढ़ोतरी की बात की जाए तो हापुड़ में गत वर्ष 43 प्रति हजार बेटियों की बढ़ोतरी हुई है, वहीं बुलंदशहर में 38 प्रति हजार की सर्वाधिक बढ़ोतरी हुई है। बुलंदशहर में अप्रैल 2016 से मार्च 2017 तक 1000 बेटों पर मात्र 902 बेटियों का जन्म हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. केएन तिवारी ने बताया कि जिले में बालिकाओं के लिंगानुपात में अभी और सुधार की जरूरत है। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। बालिकाओं के लिंगानुपात बढ़ाने के लिए ब्लॉक स्तर एवं ग्राम स्तर पर ग्रामीणों को जागरूक करने को गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। जिले में लिंग जांच फिलहाल किसी भी सेंटर पर नहीं की जा रही है। यदि लिंग जांच का कोई केस सामने आता है या सूचना मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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पिछले दो साल में घटा एवं बढ़ा अनुपात
जिले का नाम अप्रैल-मार्च (15-16) अप्रैल-मार्च (16-17) अंतर
गाजियाबाद 977 908 -69
बुलंदशहर 864 902 +38
हापुड़ 857 900 +43
मेरठ 878 884 +6
बागपत 903 882 -21
गौतमबुद्ध नगर 873 875 +2

नोट - सभी आंकड़े स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें बेटियों की संख्या प्रति हजार में है।
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