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जिले में 7112 परिवारों के पास नहीं है आवास

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जिले में 7112 परिवारों के पास नहीं है आवास
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- जिला प्रशासन ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर चिन्हित किए पात्र परिवार
- शासन को सभी परिवाराें की लिस्ट देकर की आवास बनवाने की संस्तुति
- प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं से बनेंगे मकान
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर। केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास देने के लिए अनेक योजनाएं चला रखी हैं। इसके बावजूद आज भी जिले में 7112 परिवारों के पास आवास नहीं है। खास बात यह है कि अब इन परिवारों को चिन्हित कर आवास बनवाने की दिशा में जिला प्रशासन ने कदम बढ़ा दिए हैं। इतना ही नहीं शासन को सभी परिवारों की सूची देकर मकान बनवाने की संस्तुति कर दी गई है।
केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 646 आवास मिले। वर्ष 2017-18 में 101 आवास की सौगात मिली। इसके लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2011 की जनणगना के आधार पर पात्रों का चयन किया और अब यह सभी आवास इसी माह तक बनकर तैयार हो जाएंगे। इसके साथ ही बसपा और सरकार के शासन काल में भी जरूरतमंद और गरीबाें के लिए आवास बनवाए गए। भाजपा की प्रदेश सरकार की ओर से अभी आवास के लिए कोई पहल नहीं की गई है। मगर, जिला प्रशासन ने जिले में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 7112 परिवार ऐसे चिन्हित किए हैं, जिनके पास आवास नहीं है। इन परिवारों को आवास दिलवाने के लिए लिस्ट शासन को भेजकर आवास बनवाने की संस्तुति कर दी है। यह आवास प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं से बनेंगे।
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आवास बनवाने के लिए ऐसे बनी मंशा
- वर्ष 2016-17 में जब प्रधानमंत्री आवास की जिले को सौगात मिली तो उस समय वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 12500 परिवार ऐसे शामिल थे, जिनके पास आवास नहीं होना दर्शाया गया था। जब जिला प्रशासन की ओर से सर्वे किया गया तो उनमें से करीब 11 हजार परिवारों के पास मकान पाए गए। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने सर्वे के दौरान 7112 ऐसे परिवारों को चिन्हित किया, जिनके पास आवास नहीं हैं। यह ऐसे परिवार हैं, जो वर्ष 2011 की जनगणना में भी शामिल नहीं हैं।
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कोट
जिले में 7112 परिवार ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनके पास आवास नहीं हैं। इन परिवारों को चिन्हित कर उनके आवास बनवाने के लिए शासन को सूची भेज दी है। इन परिवारों के आवास प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य योजनाओं से बनवाए जाने का प्रयास किया जाएगा।
- सर्वेश चंद, निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
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