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शिक्षामित्र नहीं पहुंच रहे स्कूल, गड़बड़ाया शिक्षा का गणित

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80 फीसदी से कम मिले बच्चे तो प्रधानाचार्य को प्रतिकूल प्रविष्टि
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- शिक्षामित्रों के आंदोलन के कारण स्कूलों में गिर रहा शिक्षा का स्तर
- शिक्षामित्र और अन्य शिक्षकों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन पर चल रहे शिक्षामित्र स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में शिक्षा का गणित बिगड़ गया है। वहीं दूसरी ओर स्कूलों में छात्र उपस्थिति न होने को लेकर विभाग ने शिकंजा कसने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब स्कूलों में छात्र उपस्थिति का आंकलन किया जाएगा। जिन विद्यालयों में 80 फीसदी से कम छात्र मिलेंगे, वहां के प्रधानाध्यापक, अध्यापक व शिक्षामित्र का वेतन रोकते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी।
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जिले में बेसिक शिक्षा विभाग 2399 परिषदीय स्कूल हैं। इसमें 2600 से अधिक शिक्षामित्रों की तैनाती है। लगभग सभी प्राथमिक विद्यालयों में एक से दो शिक्षामित्र तैनात हैं। इसमें लगभग 1600 शिक्षामित्र समायोजित होकर सहायक अध्यापक बन गए थे। 25 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद से शिक्षामित्र स्कूल नहीं जा रहे हैं। स्कूलों में शिक्षण कार्य का बहिष्कार किए हुए हैं। कई शिक्षक संगठन भी इनका साथ दे रहे हैं। किसी तरह जिन बच्चों का दाखिला स्कूलों में हुआ है, अब अध्यापकों की लापरवाही से स्कूल नहीं आ रहे हैं। दो लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई चौपट हो रही है। स्कूल में शिक्षक पूरे नहीं होने पर या तो छात्र घर लौट रहे हैं या फिर वह कक्ष में बैठे इंतजार करते रहते हैं। उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुपालन में खंड शिक्षा अधिकारियों से छात्र उपस्थिति का आकलन करने का निर्देश जारी करने की तैयारी की जा रही है। आकलन शुरू होने के बाद रिपोर्ट आने पर 80 फीसदी से कम उपस्थिति मिलने पर प्रधानाचार्य और अन्य को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाएगी। बीएसए अजीत कुमार का कहना है कि शिक्षामित्रों के धरना-प्रदर्शन पर रहने के कारण शिक्षा का स्तर गिर रहा है और पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उन्होंने 80 फीसदी से कम छात्र उपस्थिति पर प्रतिकूल प्रविष्टि देने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने अध्यापकाें और शिक्षामित्रों से नियमित स्कूल पहुंचकर पढ़ाई कराने के निर्देश दिए हैं।
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