जहरीली हवा बिगाड़ रही फेफड़ों की ‘केमिस्ट्री’
- हवा से शरीर में प्रवेश कर रहे 140 माइक्रोग्राम हानिकारक कण
- हवा में सल्फर-डाई-आक्साइड और नाइट्रोजन-डाई-आक्साइड सामान्य
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
जहरीली हवा के कारण जिले में फेफड़े, सांस के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों के अनुसार कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के हिसाब से खुर्जा क्षेत्र में हवा सांस लेने लायक नहीं है। नाक द्वारा फेफड़ों तक पहुंचने वाली हवा में औसतन कण 100 माइक्रोग्राम प्रति मिनट से अधिक नहीं होना चाहिए। मगर खुर्जा की हवा में हानिकारक कणों की मात्रा सामान्य से काफी अधिक है। खुर्जा की हवा में विद्यमान हानिकारक कणों की मात्रा 100 से बढ़कर 157 माइक्रोग्राम और 172 माइक्रोग्राम पहुंच गई है। प्रदूषित हवा से लोग समय से पहले थककर हांफ रहे हैं। बता दें कि हवा के द्वारा नाक में जाने वाले कणों का आकार औसतन 10 माइक्रोग्राम होता है। खुश करने वाली बात यह है कि हवा में नाइट्रोजन-डाई-आक्साइड और सल्फर-डाई-आक्साइड की मात्रा खतरनाक बिंदु से काम है। नाइट्रोजन-डाई-आक्साइड की मात्रा 21-22 माइक्रोग्राम और सल्फर-डाई-आक्साइड की मात्रा 22 और 20 माइक्रोग्राम निकली है। सामान्य तौर पर यह मात्रा अधिकतम 80 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा की सेहत बिगाड़ने वाले 100 यूनिटस को नोटिस भेज जवाब मांगा है। बता दें कि लोकसभा में प्रदूषित हवा का मुद्दा उठाया गया था। बुलंदशहर के प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने लोकसभा को जनपद में हवा का स्टेटस भेज दिया है। प्रदूषण की रिपोर्ट के साथ कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है।
ऑनलाइन मॉनीटरिंग के दावे फेल
एनजीटी ने आदेश दिए थे कि फैक्ट्रियों में सिस्टम लगाकर प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की जाए, लेकिन छह माह से अधिक समय बीतने के बाद भी खुर्जा की मीट फैक्ट्रियों में प्रदूषण की ऑनलाइन मॉनीटरिंग की व्यवस्था फेल नजर आ रही है। पॉटरी मालिकों ने अभी अपनी फैक्ट्रियों में सिस्टम लगाकर प्रदूषण विभाग के सर्वर से कनेक्ट नहीं किया है।
खुर्जा की हवा में हानिकारक कणों की अधिकता पाई गई है। हवा में औसतन कण 100 माइक्रोग्राम प्रति मिनट से अधिक नहीं होने चाहिए। हालिया रिपोर्ट में हानिकारक कण 170 तक पाए गए हैं। - जीएस श्रीवास्तव, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
बड़े पैमाने पर प्रदूषित हवा शरीर में जाने से फेफड़ों के कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। इसके लिए लोग मुंह पर मास्क पहनें तथा धुएं या अन्य प्रदूषित स्थान पर कम से कम जाएं। - डॉ. केएन तिवारी, सीएमओ