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संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी: सुभाषिनी

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संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी
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- दलित शोषण मुक्ति मंच के स्थापना सम्मेलन में बोलीं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली
अमर उजाला ब्यूरो
बुलंदशहर।
पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि भाजपा और उसका मात्र संगठन आरएसएस दलितों में फूट डालकर अपने मनुवादी एजेंडे को, जिसमें दलित के सामाजिक व आर्थिक उत्पीड़न को स्थायी रूप प्रदान करने की व्यवस्था हो, आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। शोषण, उत्पीड़न व दलितों के हितों के लिए संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी है।
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सुभाषिनी अली बुधवार को नगर के मैरिज होम में दलित शोषण मुक्ति मंच के स्थापना सम्मेलन में लोगों को संबोधित कर रही थीं। सुभाषिनी ने कहा कि सदियों से अधिकारों से वंचित व उत्पीड़ित दलितों को कुर्बानियों के बाद संविधान में अधिकार हासिल हुए थे। आज भाजपा की सरकार बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए उस संविधान को ही ध्वस्त करने में लगी है। सरकार की उदारवादी नीतियों का सबसे बड़ा खामियाजा दलितों को उठाना पड़ रहा है। जिसमें निजीकरण के चलते सरकारी नौकरियों में अधिकार छीन रहा है। शिक्षा का निजीकरण भी दलित बच्चों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी से आह्वान किया कि वह संगठित होकर अपने सामाजिक उत्पीड़न के खिलाफ आवाज बुलंद कर दलित आंदोलन को जनवादी आंदोलन के साथ एकजुटता कायम करें। सम्मेलन के संयोजक सुरेश चंद ने संगठन की रिपोर्ट पेश की। सम्मेलन के संगठन राज्य संयोजक विनोद रावत ने भी विचार व्यक्त किए। खेत मजदूर यूनियन के राज्य अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ने बताया कि सम्मेलन में 31 सदस्यीय जिला कमेटी का चुनाव किया गया। इसमें सुरेश चंद को संरक्षक, सोमचंद को जिला संयोजक, सुखदेव सिंह एडवोकेट व वीरेंद्र कुमार को सह संयोजक बनाया गया। इसी तरह कमेटी के सदस्यों के नामों की घोषणा की गई।
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