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कर्मचारियों के वेतन का प्रतिवर्ष 7 करोड़ डकार जाते हैं अफसर-ठेकेदार

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कर्मचारियों के वेतन का प्रतिवर्ष 7 करोड़ डकार जाते हैं अफसर-ठेकेदार
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- वेतन व पीएफ के नाम पर प्रतिवर्ष किया जाता है घपला
- शासन के निर्देशों को ताक पर रखकर दिया जाता है निर्धारित से कम वेतन
- छह माह से अधिक का भुगतान न होने पर हाल ही में कर्मियों ने किया था धरना प्रदर्शन
- जिले में बिजली विभाग में कार्यरत हैं 750 संविदा कर्मचारी
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर।
अफसर और ठेकेदार पावर कॉरपोरेशन में कार्यरत संविदा कर्मचारियों का वेतन व पीएफ के नाम पर प्रतिवर्ष सात करोड़ रुपये डकार जाते हैं। शासन की सख्त हिदायत के बावजूद संविदाकर्मियों को आज भी आधा वेतन ही मिल पाता है। वेतन आदि की मांग के लिए जब कर्मचारी विरोध प्रदर्शन करते हैं तो ठेकेदार अफसरों से मिलकर उन्हें निकालने की धमकी देते हैं।
पावर कॉरपोरेशन में संविदा कर्मचारियों के वेतन व पीएफ के नाम पर अफसर व ठेकेदार मिलकर करोड़ों का हेरफेर कर रहे हैं। यदि कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन और सरकार द्वारा निर्धारित वेतन, पीएफ व बीमा के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अफसर-ठेकेदार मिलकर प्रतिवर्ष सात करोड़ रुपये डकार जाते हैं। नियम यह है कि ठेकेदार कर्मचारियों को प्रतिमाह निर्धारित वेतन, पीएफ व बीमा, ईपीएफ, ईएसआई की रसीद देगा, लेकिन आज तक किसी भी कर्मचारी को इनमें से कोई भी रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताते चलें कि बिजली विभाग में जिले में टेक्निकल व नॉन टेक्निकल 750 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। नियमानुसार इनके वेतन का 10 फीसदी पीएफ के लिए काटा जाना आवश्यक है, लेकिन ठेकेदारों ने आज तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की है।
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कर्मचारियों की संख्या निर्धारित वेतन प्राप्त वेतन
टेक्निकल 450 9700 मासिक 5000 मासिक
नॉन टेक्निकल 300 8700 मासिक 4500 मासिक

ऐसे लगाते हैं प्रतिवर्ष सात करोड़ की चपत
कर्मचारियों के लिए निर्धारित वेतन की अपेक्षा उन्हें आधा वेतन ही दिया जाता है। टेक्निकल कर्मचारियों के निर्धारित व प्राप्त वेतन में 4700 रुपये का अंतर है। कुल 450 टेक्निकल कर्मचारियों के प्रतिमाह अंतर की यह राशि 21.15 लाख रुपये बनती है। वहीं नॉन टेक्निकल कर्मचारियों के वेतन का अंतर 4200 रुपये के हिसाब से 12.60 लाख रुपये प्रतिमाह है। इससे कुल धनराशि प्रतिमाह 33.75 लाख रुपये बनती है।

पीएफ व ईएसआई का होता है खेल
नियमानुसार प्रत्येक कर्मचारी के वास्तविक वेतन का 12 फीसदी पीएफ खाते में जमा करना होता है। इसमें इतना ही योगदान सरकार का भी होता है। ठेकेदारों द्वारा पीएफ में धनराशि जमा न करने पर सरकार द्वारा कोई योगदान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते प्रतिमाह 16.74 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है।

ऐसे होता है सात करोड़ का घोटाला
कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन की विसंगति 33.75 लाख व पीएफ का 16.74 लाख रुपये जोड़ दिया जाए तो प्रतिमाह 50.50 लाख रुपये का घपला होता है। यदि इसकी वार्षिक गणना की जाए तो यह धनराशि 6.6 करोड़ रुपये होती है।

छह माह से अटका पड़ा है वेतन
संविदा कर्मचारियों को ठेकेदारों ने गत छह माह से कोई भुगतान नहीं किया है। इसके चलते कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है। वेतन व पीएफ की मांग को लेकर कर्मचारी कई बार धरना प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन अफसरों ने आश्वासन देने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की है।
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कोट
कर्मचारियों को पूरा वेतन दिलाने की तैयारी की जा रही है। किसी भी हाल में कर्मचारियों का शोषण नहीं किया जाएगा। शीघ्र ही कर्मचारियों को उनका पूरा वेतन दिलाया जाएगा।
- संजीव राना, एसई, पावर कॉरपोरेशन
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