जिले में इस बार भी नहीं बढ़ेंगे सर्किल रेट
नोटबंदी के दौरान बैनामों में आई कमी के चलते लक्ष्य से पिछड़ा स्टांप विभाग इस वर्ष कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। विभाग के अफसर राजस्व बढ़ाना तो चाहते हैं, लेकिन सर्किल रेट नहीं बढ़ाना चाहते।
इस बार सर्किल रेट बढ़ने के आसार कम ही हैं। एडीएम वित्त की अध्यक्षा में हुई बैठक के बाद रजिस्ट्रार सर्किल रेट बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। स्टांप विभाग को वर्ष 2015-16 में 192 करोड़ रुपये का राजस्व वसूली का लक्ष्य मिला था। विभाग ने किसी तरह लक्ष्य को प्राप्त कर लिया।
वर्ष 2016-17 में जनपद को 296 करोड़ रुपये का लक्ष्य मिला। अफसरों ने राजस्व वसूली के लिए जिलेभर में अभियान चलाया, लेकिन नोटबंदी ने बैनामे और इकरारनामों पर ब्रेक लगा दिया। वर्ष 2015-16 में बैनामों की संख्या 29,806 थी, जबकि वर्ष 2016-17 में इसकी संख्या महज 25,421 रह गई।
यही हाल इकरारनामों का रहा। पिछले साल के मुकाबले वर्ष 2016-17 में 2,468 कम इकरारनामे हुए। हाल ही में एडीएम वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में एआईजी स्टांप और सभी तहसीलों के निबंधक मौजूद थे, जिसमें सर्किल रेट बढ़ाने पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद एडीएम वित्त ने सभी निबंधक और उप निबंधकों से आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। अफसरों का कहना है कि इस बार भी राजस्व वसूली में पिछड़ने के चलते सर्किल रेट बढ़ने की संभावनाएं कम हैं।
ज्यादातर उप निबंधक पुराने सर्किल रेट की सूची को ही जारी करने का सुझाव दे रहे हैं। साथ ही पुरानी सूची में कुछ बिंदुओं पर सुधार की बात कह रहे हैं। सर्किल रेट पर अगली बैठक 29 जुलाई को होगी।
एआईजी स्टांप जेएन सिंह ने बताया कि इस बार सर्किल रेट बढ़ने की संभावनाएं कम हैं। सर्किल रेट बढ़ने के लिए बैठकों का दौर चल रहा है। सर्किल रेट बढ़ेंगे या घटेंगे, इसका निर्णय डीएम की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लिया जाएगा।