अब प्रधान जी बताएंगे कितने बच्चे हुए कुपोषण मुक्त
शासन मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने और कुपोषित बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए एक ऐसी पहल शुरू करने जा रहा है, जिससे अब उनको दी जा रही सुविधाओं आदि पर सीधे सरकार और विभागीय अफसरों की नजर होगी।
इसके लिए लखनऊ में मेगा कॉल सेंटर बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रधान जी के अलावा आंगनबाड़ी और एएनएम से मोबाइल पर बात कर प्रक्रिया का पता लगाया जाएगा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से गर्भवती, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने और कुपोषण से ग्रस्त बच्चों के स्वास्थ्य सुधारने के लिए कई तरह की योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।
अब तक इन योजनाओं पर जिला स्तर के अधिकारियों की ही नजर रहती थी लेकिन, योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की शिकायतों के मद्देनजर अब शासन ने सीधे निगरानी का निर्णय लिया है। इस कार्य में गांव के प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम से सीधा संपर्क होगा।
इसके लिए लखनऊ में मेगा कॉल सेंटर खुल गया है। योजना को सफल बनाने के लिए प्रधानों, आंगनबाड़ी और एएनएम के मोबाइल नंबर एकत्रित करने का काम जारी है।
ज्ञात हो कि जिले में कुपोषण से ग्रस्त बच्चों की संख्या एक लाख के आसपास है। इनके बेहतर स्वास्थ्य और कुपोषण से मुक्ति दिलाने को विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।
वहीं आंगनबाड़ी से गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर भी योजनाएं चल रही हैं। यह अलग बात है कि हॉटकुक के बाद अब पोषाहार का वितरण भी बंद है।
कुपोषण से ग्रस्त बच्चों के स्वास्थ्य की सीधे जानकारी लेने के अलावा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए लखनऊ में मेगा कॉल सेंटर खुल गया है। इसके माध्यम से अब ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और एएनएम से सीधे संपर्क होगा। उनके मोबाइल नंबर एकत्रित करने का काम जारी है और मेगा कॉल सेंटर जल्द शुरू हो जाएगा। - शुभांगी कुलकर्णी, सीडीपीओ