वाटर स्कूल किसानों को सिखाएंगे जल संरक्षण
हर साल भूगर्भ जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पानी की कमी होगी। इस कमी का असर कृषि पर भी पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने जल बचाने और कृषि की उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
इसके लिए जिलों में किसान प्राइमरी वाटर स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही है। यह काम विश्व बैंक की मदद से होगा। प्रदेश सरकार ने जल की उपलब्धता को बरकरार रखने और जल संकट से कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए विश्व बैंक की मदद से प्रदेश भर में 470 किसान प्राइमरी स्कूल खोलकर किसानों को जल संरक्षण के तरीके सिखाने के लिए योजना बनाई है।
माइनर और कुलाबा सिंचाई स्तर पर खुलने वाले इन स्कूलों में किसानों को जल संरक्षण की ट्रेनिंग के साथ नवीनतम सिंचाई विधियों का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इतना ही नहीं कृषि उत्पादकता बढ़ाने की जानकारी भी दी जाएगी।
सिंचाई विभाग के माध्यम से कृषि विभाग इन स्कूलों का संचालन करेगा। किसान प्राइमरी स्कूल खोलने की तैयारी शुरू हो गई है और इसकी जानकारी जिला स्तरीय कृषि अधिकारियों को भी दी जा चुकी है।
जिले में 11 ब्लॉक आ चुके हैं डार्कजोन में
जिले का भूगर्भ जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि 16 ब्लॉकों में 11 ब्लॉक डार्कजोन की स्थिति में आ चुके हैं। गुलावठी, खुर्जा, सिकंदराबाद, दानपुर, बीबीनगर, शिकारपुर, पहासू और बुलंदशहर डार्क जोन में आ चुके हैं, जबकि स्याना, ऊंचागांव और डिबाई ब्लॉक सेमी क्रिटिकल श्रेणी में हैं।
किसान प्राइमरी वाटर स्कूल जहां जल संरक्षण करने में मददगार साबित होंगे, वहीं कम पानी में अधिक उत्पादकता की किसानों को जानकारी देने में सहायक होंगे। प्रदेश सरकार की इस योजना से काफी हद तक पानी बचाया जा सकेगा। इस संबंध में शासन से जानकारी मिल गई है और योजना जल्द ही शुरू होने वाली है। शासन स्तर पर तेजी से तैयारी की जा रही है। - अश्विनी कुमार, जिला कृषि अधिकारी।