सरकार! ट्रामा सेंटर को है ‘इलाज’ की दरकार
खुर्जा। दुर्घटनाग्रस्त लोगों को तत्काल इलाज देने के उद्देश्य से बनाया गया ट्रामा सेंटर महज एक ‘इमरजेंसी कक्ष’ बनकर रह गया है। वजह, विशेषज्ञ और स्टाफ की कमी। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से जाटिया अस्पताल में बने इस ट्रामा सेंटर में अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। लिहाजा, यहां आने वाले घायलों को कुछ मरहम और दवाएं आदि देकर रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में अब इस सेंटर को खुद इलाज की दरकार है।
खुर्जा तहसील क्षेत्र में एक्सीडेंटल डेथ रोकने के लिए जटिया अस्पताल में ट्रामा सेंटर बनाया गया था। निर्माण में 10 करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च की गई थी, लेकिन ट्रामा सेंटर में सुविधाओं और चिकित्सकों के अभाव में इमरजेंसी सुविधा शुरू कर दी गई। फिलहाल इसमें केवल तीन चिकित्सकों की की तैनाती है। ऐसे में एक्सीडेंटल केस में इलाज कराने के लिए घायलों को निजी चिकित्सकों और नोएडा, दिल्ली, अलीगढ़ आदि का सहारा लेना पड़ रहा है।
वहीं जटिया सरकारी अस्पताल का हाल भी बेहाल है। यहां प्रतिदिन लगभग 300 मरीज आते हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ता है। ट्रामा सेंटर के लिए फिजीशियन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, सामान्य सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, स्त्री रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, हृदय रोग, दंत रोग, नाक-कान रोग, चर्म रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, कास्ट टेक्नीशियन, एक्सरे व लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, नर्स स्टाफ, वार्ड ब्वाय, स्वीपर और एंबुलेंस चालक सहित करीब पचास से अधिक विशेषज्ञों और स्टाफ की जरूरत है। इसके बाद ही यहां मरीजों को जरूरी इलाज मिल सकेगा।
बंद पड़े हैं ओटी-आईसीओ और एक्सरे कक्ष
जटिया अस्पताल में एक्सरे-आईसीयू और ओटी की सुविधा दिलाने के लिए अलग से निर्माण कराया गया है। इस पर शासन ने लाखों रुपये खर्च किए। चिकित्सकों के अभाव के चलते दोनों इन दोनों स्थानों पर ताले लटके हुए हैं। वर्तमान में अस्पताल परिसर में हड्डी और मोतियाबिंद के ऑपरेशन की ही सुविधा उपलब्ध है।
मरीजों की जेब पर भारी पड़ रहा इलाज
जाटिया अस्पताल में आने वाले घायलों और मरीजों को एक्सरे और जांच आदि के लिए प्राइवेट सेंटरों पर जाना पड़ता है। इससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। सरकारी अस्पताल में एक्सरे 60 और अल्ट्रासाउंड 100 रुपये में होता, लेकिन इसके लिए मरीजों को बाहर से एक्सरे के लिए 250 रुपये और अल्ट्रासाउंड के लिए 500-550 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
हालात से वाकिफ हैं अधिकारी-जनप्रतिनिधि
अस्पताल में समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि तक सभी निरीक्षण कर चुके हैं। निरीक्षण के दौरान मरीजों ने समस्याओं के बारे में उन्हें अवगत भी कराया है। बावजूद इसके अस्पताल की दशा में सुधार के लिए कोई पहल नहीं हो रही है।
चिकित्सक और टेक्नीशियन की कमी के चलते ओटी, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड बंद है। ट्रामा सेंटर में व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिख कर कई बार अवगत कराया जा चुका है। - डा. प्रीतम सिंह, सीएमएस जटिया अस्पताल।