खुले में शौच मुक्ति को फंड की कमी आ रही आडे़
- 16,259 शौचालयों के सापेक्ष 7,516 शौचालयों का हुआ निर्माण
- तहसील क्षेत्र को मार्च 2018 तक खुले में शौच से मुक्त कराने का है लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
सिकंदराबाद।
तहसील क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण योजना को शुरू हुए पांच साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन पांच सालों में तहसील क्षेत्र में 16,259 शौचालयों के सापेक्ष केवल 7,516 शौचालयों का ही निर्माण हुआ है। ऐसे में तहसील क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराने का प्रशासन का दावा हवाहवाई लग रहा है। शौचालय निर्माण की धीमी रफ्तार के लिए ब्लॉक अधिकारी फंड का रोना रो रहे हैं।
खुले में शौच से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में शौचालय निर्माण योजना शुरू की थी। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद खुले में शौच मुक्ति को स्वच्छ भारत मिशन से जोड़कर युद्ध स्तर पर लिया गया। तहसील सिकंदराबाद को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए क्षेत्र में 16,259 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया। लक्ष्य के सापेक्ष तहसील क्षेत्र में अब तक 7,516 शौचालयों का निर्माण कराया गया है। वहीं 93 ग्राम पंचायतों, 141 राजस्व गांव के सापेक्ष 15 ग्राम पंचायत,17 राजस्व गांव को खुले में शौच से मुक्त कराया गया है। जबकि प्रशासन ने तहसील क्षेत्र को खुले में शौच से मुक्त कराने के लिए मार्च 2018 का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस संबंध में एडीओ पंचायत गब्बर सिंह ने कहा कि योजना 2012 में शुरू हुई थी। 2014 में इसे स्वच्छ भारत मिशन से जोड़ा गया। पर्याप्त फंड न मिलने के कारण शौचालय निर्माण की गति धीमी है। समय से फंड नहीं मिलने के कारण शौचालय निर्माण नहीं हो पा रहा है।