बुलंदशहर। भीषण गर्मी में लोगों को बिजली संकट से निजात दिलाने के लिए पिछले साल में करीब 100 करोड़ रुपये ट्रांसफार्मर की क्षमतावृद्धि पर खर्च किए गए, लेकिन इसके बाद भी प्रति माह 250 केवीए के करीब 300 ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। जबकि प्रतिमाह फुंकने वाले 250 केवीए से अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मर की संख्या करीब 50 है। स्थिति यह है कि डिबाई खंड के एक्सईएन ने सुल्तानपुर बिलौनी बिजलीघर पर पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर फुंकने की सूचना उच्चाधिकारियों को भी नहीं दी। यदि ट्रांसफार्मर फुंकने की जानकारी अधिकारियों को दी जाती तो एक्सईएन की जिम्मेदारी तय होती और कार्रवाई भी होती।
गर्मी के मौसम में लोगों को बिजली संकट से परेशानी न झेलनी पड़े, इसके लिए शासन ने ओवरलोड ट्रांसफार्मर की क्षमतावृद्धि के आदेश दिए थे, ताकि किसी भी हाल में ट्रांसफार्मर न फुंकें और लोगों को बिजली संकट न झेलना पड़े। इसके लिए 2024-25 में करीब 100 करोड़ रुपये भी जारी किए गए, अधिकारियों ने इस धनराशि से ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि भी की, लेकिन इसके बाद भी स्थिति काफी खराब है। वर्कशॉप के आंकड़ों के मुताबिक 250 केवीए क्षमता तक के प्रतिदिन करीब 18 ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए वर्कशॉप लाए जा रहे हैं। जबकि एक माह पहले तक यह आंकड़ा केवल 10 से 12 प्रतिदिन था। 250 केवीए से अधिक क्षमता के प्रतिदिन छह से आठ ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, जिन्हें या तो मौके पर ही ठीक किया जाता है, अन्यथा की स्थिति में कंपनी की ओर से बदल दिया जाता है।
जांच में होता है खेल
जिले में बड़े ट्रांसफार्मर के फुंकने पर इसकी जांच के नाम पर खेल कर दिया जाता है। स्थिति यह है कि 11 अप्रैल को डिबाई के सुल्तानपुर बिलौनी बिजलीघर पर लगा पांच एमवीए क्षमता का ट्रांसफार्मर फुंक गया, लेकिन अधिशासी अभियंता ने उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी ही नहीं दी। जबकि जांच में इसे आकाशीय बिजली से फुंकना दर्शाते हुए नया ट्रांसफार्मर लगा दिया। चर्चा है कि बड़ा ट्रांसफार्मर फुंकने पर सीधे अधिशासी अभियंता पर कार्रवाई होनी थी, इसलिए उच्चाधिकारियों को जानकारी ही नहीं दी गई।
जिम्मेदारों पर नहीं हो रही कार्रवाई
शहर व देहात में आए दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई। एक अप्रैल को ट्रांसफार्मर फुंकने पर दो जेई को निलंबित किया गया था। जेई संघ के धरना प्रदर्शन के बाद दोनों जेई को बहाल कर दिया गया, लेकिन इसके बाद किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों ने कदम नहीं उठाया है।
ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर पिछले वर्ष ट्रांसफार्मर की क्षमतावृद्धि कराई गई थी। इस पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। ट्रांसफार्मर फुंकने के कई कारण हो सकते हैं और ओवरलोडिंग इसमें से एक प्रमुख कारण है। ओवरलोडिंग या तेल की कमी से ट्रांसफार्मर फुंकता है तो इस पर कार्रवाई की जाती है। डिबाई में फुंके ट्रांसफार्मर की कोई सूचना नहीं दी गई।
अधिशासी अभियंता राजीव कुमार आर्य ने बताया कि डिबाई खंड के सुल्तानपुर बिलौनी बिजलीघर पर 11 अप्रैल को पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर फुंक गया था। बिजली गिरने के कारण ट्रांसफार्मर की इंशुलेशन डैमेज हुई थी। ट्रांसफार्मर को बदलवा दिया गया है।