कादरचौक (बदायूं)। सोलह सौ किलोमीटर का सफर तय करके आखिरकार प्रदीप श्रीवास्तव अपनी सरजमीं पर पहुंच ही गया। इसके बावजूद उसे घर जाने का मौका नहीं मिला। उसे गांव के बाहर ही ग्राम प्रधान ने रोक लिया। पहले उसे जिला अस्पताल स्क्रीनिंग के लिए भेजा गया। मंगलवार को उसकी स्क्रीनिंग हुई। तब उसे गांव के बाहर एक बिल्डिंग में क्वांरटीन किया गया है। इस पर भी उसे संतोष है कि कम से कम वह अपने परिवार के नजदीक तो पहुंच गया।
ग्राम सकरी कासिमपुर निवासी प्रदीप श्रीवास्तव हैदराबाद में बर्फ का ठेला लगाता था, जबकि उसके साथ गांव के राजेश, मुकेश बुधपाल, रियाज और शाहिद, जाहिद, राशिद तीनों भाई अलग-अलग काम करते थे। प्रदीप श्रीवास्तव के मुताबिक हैदराबाद यहां से करीब सोलह सौ किलोमीटर दूर है। लॉकडाउन में उन्हें खाने-पीने की दिक्कत महसूस होने लगी। तब उन्होंने घर लौटने का फैसला लिया। आठों लोग 20 अप्रैल को हैदराबाद से पैदल चले थे। उन्होंने पुलिस के डर से दो-दो लोगों की टोलियां बना ली थीं। जहां खाने को मिल गया तो खा लिया, नहीं तो चलते रहे। बीच में कुछ वाहनों का भी सहारा लिया। धीरे-धीरे करके उनके पास पैसे खत्म होते गए और आठों लोग एक-दूसरे से बिछड़ते गए। रास्ते में वे लोग कहां छूट गए, इसका पता ही नहीं चला। सबके मोबाइल बंद हो चुके थे, जिससे उनसे संपर्क हो सकता था।
प्रदीप के अनुसार उसने रास्ते में 1300 रुपये में अपना मोबाइल तक बेच दिया। कहीं ट्रक मिल गया तो उसी में सवार हो गए, तो कभी पैदल चले। ऐसे सफर तय करके प्रदीप मंगलवार को अपने गांव पहुंचा। वह घर पहुंचता उससे पहले ग्राम प्रधान ने उसे गांव के बाहर रोक लिया। पहले उसकी स्क्रीनिंग कराई, तब कहीं उसे गांव के बाहर आइसोलेट किया गया। इसके बाद उसका सैंपल जाएगा। प्रदीप ने बताया कि उसे अपनों को देखकर खुशी मिल रही है। रास्ते में जो दुख मिले, इस खुशी के आगे वो दुख कुछ नहीं है।
लखनऊ से खरीदी साइकिल और दौड़ा गांव : कादरचौक थाना क्षेत्र के ग्राम असरासी निवासी रविंद्र लखनऊ में रहकर अपना काम कर रहा था। वह कई दिन से इस फिराक में था कि वह घर कैसे लौटे। उसके पास पैसे खत्म हो गए थे। परिवार वालों से बात हुई तो उन्होंने रविंद्र के खाते में रुपये ट्रांसफर कराए। तब रविंद्र ने लखनऊ में एक साइकिल खरीदी। फिर रविंद्र ने साइकिल को गांव के लिए दौड़ा दिया। रविंद्र तीन दिन पहले लखनऊ से चला था। मंगलवार को वह गांव पहुंच गया। ग्राम प्रधान अर्जुन सिंह को जब इसके बारे में पता चला तो उन्होंने रविंद्र को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेज दिया।
गुजरात से बाइक चलाकर पहुंचे घर : कादरचौक क्षेत्र के ग्राम सकरी निवासी दो युवक गुजरात के बड़ोदरा से बाइक चलाकर घर पहुंचे। सकरी निवासी सुखदेव और रजनेश बड़ोदरा में प्राइवेट फैक्टरी में काम करते थे। दोनों युवक कुछ दिन पहले चले थे। दोनों को कासगंज-बदायूं जिले की सीमा पर रोक लिया गया और उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। तब कहीं उन्हें गांव के बाहर आइसोलेट किया गया।
- सकरी कासिमपुर निवासी प्रदीप हैदराबाद से आया है जबकि असरासी निवासी रवींद्र लखनऊ से आया है। दोनों को जांच के लिए बदायूं भेज दिया गया है। - अवधेश राठौर, एमओआईसी, सीएचसी कादरचौक