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Budaun News: रिटायर्ड जवानों से मानक अनुरूप नहीं लिए जा रहे काम

Sat, 28 Sep 2024 03:30 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मौजूद गार्ड। संवाद
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बदायूं। जिला अस्पताल में तैनात किए गए रिटायर्ड आर्मी के जवानों की टीम से शासन की मंशा के अनुसार काम नहीं लिया जा रहा है। यही वजह है कि उनकी नौकरी खटाई में पड़ती दिख रही है। अस्पताल के जिम्मेदार उन पर ऐसी जिम्मेदारियां थोप रहे हैं, जो विवाद की वजह बन रही हैं। इन गार्डों को लगाया तो सुरक्षा के लिए है, लेकिन सुरक्षा के साथ इनसे व्यवस्था भी दिखवाई जा रही है।
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कोलकाता कांड के बाद शासनस्तर से देशभर के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। ताकि वहां तैनात डॉक्टर्स समेत फार्मासिस्ट, स्टाफनर्स या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ किसी तरह की हिंसात्मक घटना न हो। खासकर महिला कर्मचारियों की निगरानी का विशेष ध्यान रखते हुए यह व्यवस्था अमल में लाई गई है। जिक्र जिला अस्पताल का करें तो यहां भी 21 गार्ड मिले हैं, जिन्हें शिफ्टों में बांटकर ड्यूटी पर लगाया गया है। इनके ज्वाइनिंग लेटर में साफ जिक्र है कि गार्ड केवल सुरक्षा देखेंगे लेकिन यहां इसके विपरीत काम लिए जाने के कारण आए दिन विवाद के हालात बन रहे हैं।

बैरियर व पार्किंग ड्यूटी लगाई
गार्ड्स को सुरक्षा के लिहाज से लगातार अस्पताल में मूवमेंट करने का काम शासन ने सौंपा है। लेकिन जिला अस्पताल में उन्हें बैरियर ड्यूटी पर तैनात किया गया है। चूंकि गार्ड्स बैरियर उठाने और गिराने से कतराते हैं, ऐसे में अक्सर गंभीर मरीज लेकर आने वाली एंबुलेंस बैरियर पर खड़ी रहती है और एंबुलेंस के पायलट्स से गार्ड्स की नोकझोंक आए दिन होती है। ठीक इसी तरह स्टाफ के वाहन खड़े करने के लिए अलग से पार्किंग बनवाकर गार्ड्स को वाहन वहां खड़े कराने और रखाने की जिम्मेदारी दे दी गई है। इतना ही नहीं मरीजों के साथ एक से अधिक तीमारदार न ठहरने का प्रोटोकॊल भी गार्डों से ही पूरा कराया जा रहा है। ऐसे में जहां तीमारदारों से झड़प होती है, वहीं स्टाफ से वाहन पार्किंग को लेकर भी नोकझोंक लाजिमी है।
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दो महीने का है ट्रायल
दरअसल, ये गार्ड्स दो महीने के ट्रायल पर रखे गए हैं। इस बीच इनकी शिकायतें ज्यादा आने या विवाद अधिक होने पर इन्हें हटाने का जिक्र भी इनके ज्वाइनिंग लैटर में स्पष्ट लिखा है। जबकि अस्पताल में आए दिन होने वाले विवादों के कारण शासनस्तर तक इनका फीडबैक गलत जा रहा है।


अब ड्रेसकोड को लेकर मची रार
अस्पताल में डॉक्टर्स समेत स्टाफ को ड्रेस कोड में लाने की जिम्मेदारी भी गार्ड्स को दे दी गई है। इधर, सीएमएस डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि जो भी निर्देश मेरे द्वारा दिए गए हैं उन्हीं के हिसाब से गार्ड काम कर रहे हैं। अभी तक स्टाफ ने कोई शिकायत नहीं की है। मरीज व तीमारदार तो शिकायतें करेंगे। व्यवस्थाएं उनको सुरक्षा की ही दी गईं है। अन्य काम नहीं कराए जाएंगे।
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