बदायूं। जिला महिला अस्पताल में बना शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एसएनसीयू) सिर्फ दो बाल रोग विशेषज्ञ के सहारे चल रहा है। यहां न वेंटिलेटर है और न ही इमरजेंसी मेडिकल ऑफीसर। इसी का नतीजा है कि एक साल में समय पर सही इलाज न मिलने पर कई नवजात दम तोड़ चुके हैं। हाल ही में लापरवाही के चलते दो और नवजात की भी मौत हो गई थी।
सन 2016 में नवजात को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए महिला अस्पताल में एसएनसीयू वार्ड की शुरुआत की गई थी। यहां चार बाल रोग विशेषज्ञ और चार मेडिकल अफसर की जरूरत है लेकिन वर्तमान में डॉ कुमार वासु और डॉ संदीप वार्ष्णेय ही सेवाएं दे रहे हैं। वहीं वेंटिलेटर के लिए सात साल में 64 बार शासन को पत्राचार किया गया लेकिन मंजूरी नहीं मिल सकी। अब तो यह आलम है कि जब नवजात की हालत बिगड़ती है तो चिकित्सक बरेली या लखनऊ ले जाने की सलाह देते हैं।
एसएनसीयू में 12 नवजात को भर्ती करने की व्यवस्था है, पर रविवार को 15 बच्चे भर्ती मिले। वार्ड में एक शिफ्ट में दो एएनएम की ड्यूटी रहती है। इसके अलावा भी चार नर्स और आधा दर्जन कर्मचारी तैनात रहते हैं। तबीयत बिगड़ने पर ही ऑन कॉल चिकित्सक को बुलाया जाता है।
सुविधाएं न होना बच्चों के लिए जानलेवा
जरीफनगर क्षेत्र के रहने वाले राजकुमार यादव पत्नी ने 2 मार्च को बेटी को जन्म दिया। नवजात की हालत खराब होने पर डॉक्टर ने लखनऊ ले जाने को कहा लेकिन परिजनों ने मजबूरी बताते हुए यहीं इलाज करने गुहार लगाई। दो दिन बाद ही बच्ची की मौत हो गई।
आसफपुर क्षेत्र निवासी मनवीर की पत्नी को इसी माह 5 मार्च को बच्चे का जन्म हुआ। बच्चा कमजोर था तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया था। बच्चे को वेंटिलेटर की आवश्यकता थी। सही समय पर वेंटिलेटर न मिलने पर बच्चे ने दम तोड़ दिया।
सिविल लाइंस क्षेत्र के नवादा इलाके के रहने वाले समीर की पत्नी सोनी को 30 दिसंबर को जुडवां बच्चे पैदा हुए। एक बच्चे का वजन कम होने पर उसको एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। यहां दो दिन बाद बच्चे की मौत हाे गई।
दुर्गा कॉलोनी में रहने वाले अरुण की पत्नी सोनी को प्रसव पीड़ा होने पर महिला अस्पताल में 13 जनवरी को भर्ती कराया गया। अगले दिन सोमवार को उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। एसएनसीयू में 12 घंटे तक वार्मर नहीं मिलने से बच्ची की मौत हुई थी।
एसएनसीयू में शिशु रोग विशेषज्ञ की कमी है। ऑन कॉल डॉक्टर को बुलाया जाता है। इसी प्रकार वेंटिलेटर भी नहीं है। शासन स्तर पर उनके समय मे भी कई बार पत्राचार किया जा चुका है। अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।-डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस