उझानी/ मुजरिया। एक प्राइवेट अस्पताल में गर्भपात के समय दिव्यांग महिला की हालत बिगड़ गई। अस्पताल संचालक ने उसे आनन फानन में बरेली के अस्पताल में रेफर कर दिया। जहां उसकी मंगलवार रात मौत हो गई। बुुधवार सुबह परिजनों ने थाने जाकर पुलिस से शिकायत की। हंगामा होने के बाद अस्पताल संचालकों ने आर्थिक मदद का आश्वासन देकर मामला सुलझा लिया।
महिला मुजरिया थाना क्षेत्र गांव की निवासी थी। छह महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। चार दिन पहले अचानक ही महिला की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद आशा कार्यकर्ता बाइपास के नजदीक प्राइवेट अस्पताल में उसे ले आईं। बताते हैं कि उसके गर्भ में शिशु को मृत बताकर गर्भपात कराया गया। इसी दौरान नस कट जाने से खून बहना बंद नहीं हुआ। दूसरे दिन भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो प्राइवेट अस्पताल संचालक ने उसे बेहतर इलाज कराने के लिए बरेली के एक में अस्पताल भेज दिया।
बताते हैं कि बरेली में डॉक्टर ने देखते ही उसकी हालत नाजुक बताई। इलाज के दौरान मंगलवार रात में ही महिला की मौत हो गई। परिजन शव लेकर उझानी ले आए। उन्होंने निजी अस्पताल कर्मियों के सामने हंगामा किया। बुधवार सुबह मुजरिया थाने में शिकायत की। इसकी भनक लगते ही निजी अस्पताल संचालक ने पति को आर्थिक मदद देकर मना लिया। मुजरिया थानाध्यक्ष आरती कौशिक ने बताया कि मृतका के परिजन आए थे। मामला उझानी के अस्पताल से जुड़ा था, उन्हें उझानी जाकर शिकायत करने की सलाह दी गई। इसके बाद वह थाने नहीं लौटे हैं।
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निजी अस्पताल के पंजीकरण पर उठे सवाल
- दिव्यांग महिला की गर्भपात के बाद बरेली में मौत के बाद उझानी के निजी अस्पताल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। बताते हैं कि अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में पंजीकृत नहीं है। संचालक खुद तो डॉक्टर नहीं है, लेकिन वह बाहर से डॉक्टरों को बुलाकर मरीजों का इलाज कराता है। मामला विभागीय अफसरों के संज्ञान में बताया गया है। तीन साल पहले ऐसा ही एक निजी अस्पताल इलाज को लेकर विवाद में आया तो जांच के बाद उसे सील कर दिया गया था।
- मामला संज्ञान में आया है। हालांकि परिजनों की ओर से शिकायत नहीं की गई है, लेकिन संबंधित निजी अस्पताल को लेकर जांच कराएंगे। अगर वह बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित है तो कार्रवाई भी होगी।- राजकुमार गंगवार, चिकित्साधीक्षक