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बंदरों के हमले में छत से गिरकर महिला की मौत

सार

मोहल्ला शहवाजपुर में मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बंदरों के हमले में छत से गिरकर महिला नीरजा की मौत हो गई।काम निपटाने के बाद वह दूसरी मंजिल के छज्जे पर खड़ी हो गईं।
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नीरजा रस्तोगी (फाइल फोटो) - फोटो : BADAUN
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विस्तार
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बदायूं। मोहल्ला शहवाजपुर में मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बंदरों के हमले में छत से गिरकर महिला नीरजा की मौत हो गई। परिवार वालों ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया है।
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गढैय्या शहवाजपुर प्राइमरी पाठशाला नंबर दो पटियाली सराय के पास अरविंद रस्तोगी का आवास है। उनके दो बेटियां हिमांशी और हिमानी हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है। अरविंद रस्तोगी घर पर पत्नी नीरजा रस्तोगी के साथ रहते हैं। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे नीरजा किसी काम से छत पर गईं। काम निपटाने के बाद वह दूसरी मंजिल के छज्जे पर खड़ी हो गईं।
इसी दौरान बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वह छत से नीचे गिर गईं। सिर में गंभीर चोट आई। परिवार के लोग उन्हें अस्पताल ले जाते, उससे पहले ही उनकी मौत हो गई। नीरजा के छत से गिरने के बाद भी बंदर काफी देर तक उत्पात मचाते रहे। मौके पर परिवार के लोगों के साथ आसपड़ोस के लोग भी पहुंच गए। उन्होंने किसी तरह से बंदरों को वहां से भगाया।
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जिम्मेदार एक-दूूसरे के पाले में डाल रहे गेंद
डीएफओ अशोक कुमार सिंह का कहना है कि अक्सर मीडिया के माध्यम से मालूम होता है कि बंदरों के हमले में कोई घायल हो गया या फिर किसी की जान चली गई। यह जिम्मेदारी स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों की है। नियमानुसार अगर कोई स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत बंदरों के उत्पात से परेशान है, तो वह वन विभाग को इसकी सूचना दे और लिखित में सहयोग मांगे। इसके वाद वन विभाग कार्रवाई करेगा।
नियमानुसार उत्पाती जीवों को पकड़ने के लिए रेस्क्यू टीमों को बुलाना होता है। जहां तक मेरी जानकारी में है, बदायूं में कभी किसी स्थानीय निकाय या ग्राम पंचायत ने बंदरों को लेकर वन विभाग से कभी कोई सहयोग मांगा ही नहीं है। इधर, नगर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल का कहना है कि इस संबंध में उन्होंनें वन विभाग को लिखा है। हालांकि कब लिखा है, इसका जवाब वह टाल गई। यह जरूर कहा कि बुधवार को वह इस सबंध में डीएफओ से मिलेंगी।
कई लोगों की जान जाने का कारण बन चुके बंदर
थाना हजरतपुर के गांव जमालपुर बक्सेना निवासी माया देवी पर 15 सितंबर को बंदरों ने हमला कर दिया था। छत से गिरने से उसकी मौत हो गई थी। 11 सितंबर को जगत गांव में बच्चे निखिल की जान जाने का कारण भी ये बंदर बने थे। इससे पहले 28 अगस्त को कादरचौक कस्बे में बंदरों के झुंड ने 52 वर्षीय किसान होरीलाल पर हमला कर उसके शरीर पर कई जगह काट लिया। हमले से डरे किसान की छत से नीचे गिरकर मौत हो गई। इनके अलावा भी बंदर कई लोगों की जान जाने का कारण बन चुके हैं।

महिला की मौत के बाद घर के बाहर बैठे नाते-रिश्तेदार। संवाद- फोटो : BADAUN

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