अलापुर। जगत में चल रहे रामलीला महोत्सव के मौके पर सीता हरण की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता पंचवटी में मौजूद हैं कि सामने स्वर्ण मृग गुजरता है, जिसे देख सीता उसकी खूबसूरती को लेकर भगवान राम से उसके शिकार कर लाने को कहती हैं। सीता के आग्रह पर श्रीराम विवश हो जाते हैं और हिरण के शिकार को निकल जाते हैं। हिरण के रूप में दुष्ट राक्षस मारीच था। राम तो इस बात को समझते थे लेकिन उन्हें लीला करनी थी और सीता की बात मान गए। हिरण का पीछा करते हुए वह काफी दूर निकल गए। बाद में सीता को राम के चीखने की आवाज सुनाई देती है, जो हिरण बने मारीच ने ही निकाली थी। सीता यह आवाज सुन लक्ष्मण को अपनी चिंता से अवगत कराती हैं। लक्ष्मण एक रेखा खींचते हुए सीता को इस रेखा को पार न करने की हिदायत देकर राम की आवाज की ओर चले जाते हैं। इधर, रावण एक साधू के वेश में आकर सीता से भिक्षा मांगता है। सीता समझ नहीं पातीं और साधू बने रावण के कहने पर रेखा पार कर जाती हैं और मौका पाकर रावण उनका हरण कर लेता है। इस भाव पूर्ण दृश्य को देख दर्शक भावुक हो उठते हैं। सीता हरण के दौरान उनके करुण क्रंदन पर महिला दर्शक भी रोने बिलखने लगती हैं। संवाद