बदायूं/उसहैत। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद आसपास के गांवों की आबादी खतरे की जद में आ गई है। नदी खतरे के निशान से 22 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। आने वाले 24 घंटों में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। इसको देखते हुए प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। रविवार को एसडीएम दातागंज ने नदी के किनारे बसे गांवों का भ्रमण किया। उन्होंने ग्रामीणों को नदी की ओर न जाने के लिए कहा है।
गंगा नदी में नरौरा से 1,49,000 क्यूसेक, बिजनौर से 1,31,735 क्यूसेक और हरिद्वार से 68,759 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे क्षेत्र में बाढ़ का खतरा है। दातागंज के उपजिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह रविवार को गंगा किनारे बसे जाटी, खजुरा, जटा, प्रेमी नगला, ठकुरीनगला व अटेना आदि गांवों के निकट बने बांध और संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करने पहुंचे।
बाढ़ चौकी कटरा सादतगंज, भुंडी, अटेना आदि पर तैनात बाढ़ चौकी प्रभारी को चौकी पर ही प्रवास कर पल-पल की रिपोर्ट प्रशासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को सतर्कता बरतने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए तैयार रहने को कहा। बताया कि अभी तक स्थिति पूरी तरह सामान्य है, लेकिन लगातार पानी बढ़ने से सतर्कता जरूरी है, जिसके लिए हमारी पूरी टीम तैयार है।
उन्होंने बाढ़ खंड अधिकारियों को भी पथरामई, अहमद नगर बछौरा और जाटी के समीप तटबंधों पर नजर रखने के लिए कहा है। कानूनगो भगवान दास, लेखपाल रामप्रताप सिंह, राकेश सिंह आदि यहां मौजूद रहे।
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सहसवान क्षेत्र में गांवों के करीब पहुंचा गंगा का पानी
सहसवान। गंगा के जलस्तर में तेजी हो रही बढ़ोतरी के चलते रविवार दोपहर बाद गांवों की ओर पानी ने अपना रुख कर दिया। बांध के दूसरी पार बसे गांव भमरौलिया, वीर सहाय नगला, खागी नगला बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर गए। गांवों में भी निचले स्थानों और रास्तों पर पानी भर गया है। इन गांवों के लोग पहले से ही गंगा महावा बांध और अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। एसडीएम प्रेमपाल सिंह ने गांव जरीफपुर गढ़िया में बने आश्रय स्थल का निरीक्षण किया। यहां पशु बंधे होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और क्षेत्रीय लेखपाल को निर्देशित कर तत्काल पशुओं को वहां से हटवा दिया। बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। संवाद