साम, दाम, दंड भेद सभी का प्रयोग
बदायूं। पंचायत चुनाव में ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं की बन आई है। खुशामद से लेकर लोभ तक कई प्रकार के लुभावने मंत्र प्रत्याशी और उनके समर्थक पढ़ रहे हैं। यह बात नहीं कहीं-कहीं तो दबंगई भी चल रही है। देश की राजनीति का मंत्र साम, दाम, दंड भेद सबका खुला इस्तेमाल हो रहा है। जहां, जिस तरह से मतदाता प्रसन्न हो उसे उस तरह प्रसन्न किया जा रहा है।