खुद की नाव न होना खल रहा गांव वालों को
वीरसहाय नगला गांव के श्याम सिंह, रामभरोसे आदि ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पहले ग्रामीणों की खुद की एक नाव थी, लेकिन वह खराब हो गई। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी हो रही है। फिलहाल यहां प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है।
बुधवार को बैराजों से छोड़ा गया पानी
- नरौरा से 100877 क्यूसेक
- बिजनौर 174130 क्यूसेक
- हरिद्वार से 114569 क्यूसेक
- गंगा के खतरे का निशान-162 मीटरगेज पर
- गंगा बह रही 162.56 मीटरगेज पर
ट्रैक्टर-ट्रॉली से लोगों को कराया जा रहा पार
गंगा के साथ रामगंगा में बढ़े जलस्तर ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। साथ ही कूड़रा-मजरा मार्ग पर दो से तीन फुट पानी भर गया है। लोगों का पैदल तक निकलना बंद हो गया है। ऐसे में कुछ लोगों ने वहां पर ट्रैक्टर-ट्रॉली लगा दी है। जिससे लोगों व वाहनों को इधर से उधर निकाला जा रहा है।
जुलाई की शुरुआत से रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था, हालांकि जलस्तर बढ़ने की गति बेहद धीमी थी। जिसकी वजह से लोगों को बाढ़ आने का सही से अंदाजा नहीं लग पा रहा था, लेकिन मंगलवार को अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ गया। जिसकी वजह से खेतों में पानी भर गया।
ये भी पढ़ें- बेटी तूने ये क्या किया?: शादी के दो माह बाद दुल्हन ने दी जान, पत्नी का शव देख पति भी फंदे से लटका, ये थी वजह
वहीं बुधवार को रामगंगा का जलस्तर 160.060 मीटरगेज पर दर्ज किया गया। इससे कूड़रा-मजरा मार्ग पर दो से तीन फुट तक पानी भर गया। इसकी वजह से लोगों को उधर से निकलने में परेशानी हो रही है। दोपहर के बाद में जलस्तर इस कदर बढ़ गया कि लोग पैदल नहीं निकल पा रहे थे। फिलहाल प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के पानी से धान, मैंथा की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं कुछ जगहों पर खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी डूब गई है।
डीएम मनोज कुमार ने बताया कि गंगा और रामगंगा में पानी बढ़ने की पहले से जानकारी थी, ऐसे में सभी जगह पूर्ण व्यवस्था कर ली गईं। सभी एसडीएम को संबंधित स्थानों पर भेज दिया है। जहां जरूरत थी वहां पर नाव की व्यवस्था कर दी गई है, ताकि लोगों को आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।