बदायूं। अनुसूचित जाति की नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के मामले स्पेशल जज एससी-एसटी एक्ट उदयभान सिंह ने उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर के शरीफ उर्फ विक्की को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
एससी-एसटी कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक ऐश्वर्य कुमार राजपूत और जितेंद्र कुमार सिंह के अनुसार थाना अलापुर क्षेत्र के एक गांव के व्यक्ति ने 31 अक्टूबर 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वादी और उसकी पत्नी घर पर नहीं थे। उसी दौरान गांव के ही दो युवक उसकी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर ले गए। घटना के छह माह बाद सात मई 2019 को वादी की पुत्री को पुलिस ने बरामद किया। पीड़िता के बयानों के आधार पर उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर कस्बा रुद्रपुर वार्ड नंबर छह भूत बंगला निवासी शरीफ उर्फ विक्की पुत्र यासीन का नाम प्रकाश में आया।
पुलिस ने आरोपी को 14 मई 2019 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने वादी के गांव के दूसरे युवक की नामजदगी झूठी पाई। पुलिस ने शरीफ उर्फ विक्की के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। स्पेशल जज उदयभान सिंह ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद विक्की को दोषी ठहराते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उस पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी डाला है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड की धनराशि जमा न करने पर मुजरिम को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।