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बारिश से मौसम सुहाना, कीचड़ से परेशानी और खेती पर आफत

सार

पिछले दो दिन से मौसम का मिजाज फिर बिगड़ गया है।बृहस्पतिवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक हुई बारिश से न सिर्फ खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि सड़कों पर कीचड़ और जलभराव से लोगों को दिक्कत हो रही है।सब्जी फसलों में शिमला मिर्च, तोरई, लौकी आदि को भी नुकसान बताया जा रहा है।
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विस्तार
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बदायूं। पिछले दो दिन से मौसम का मिजाज फिर बिगड़ गया है। बृहस्पतिवार देर रात से शुक्रवार सुबह तक हुई बारिश से न सिर्फ खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि सड़कों पर कीचड़ और जलभराव से लोगों को दिक्कत हो रही है। कई जगहों पर बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी चरमरा गई है।
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बारिश में शहर व मोहल्लों की अधिकांश सड़कें जलमग्न हो गईं। नगर पालिका द्वारा नाले नालियों की सफाई व जल निकासी के कागजी दावों ने लोगों की मुसीबतों को कई गुना बढ़ा दिया। हालांकि रात में बारिश होने के कारण लोगों को शुक्रवार को सड़कों पर जलभराव का सामना तो नहीं करना पड़ा, लेकिन दिन भर रुक-रुककर हुई बारिश ने सड़कों पर कीचड़ जरूर कर दी।
मौसम के जानकार हेमवंती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी गढ़वाल के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आलोक कुमार गौतम के अनुसार अभी दो तीन दिन तक ऐसा ही मौसम रहेगा। इस दौरान कभी बारिश तो कभी बूंदाबांदी होती रहेगी। उसके बाद मौसम साफ होगा। उन्होंने बताया कि इस बार मौसम का रुख बदला है। जो बारिश अगस्त में होनी चाहिए थी वह इस बार अक्तूबर में हो रही है।
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बिल्सी। बारिश के कारण नगर के बिजलीघर रोड, साहबगंज, नगर पालिका परिषद कार्यालय एवं मोहल्ला संख्या तीन के निचले इलाके में पानी घर और दुकानों में घुस गया। इससे लोगों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। नाली में जमा कीचड़ सड़कों पर पसर गई, जिससे लोगों को निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
उसावां। बृहस्पतिवार की रात से रुक रुककर हो रही बारिश से धान व बाजरे की फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। बेमौसम की बरसात फसलों को मिटाने पर लगी हैं। इससे किसान मायूस हो चले हैं।
वर्ष -बारिश (एमएम)
2010-11 889.70
2011-12 765.60
2012-13 560.75
2013-14 785.50
2014-15 470.25
2015-16 635.75
2016-17 683.25
2017-18 582.25
2018-19 729.50
2019-20 577.50
2020-21 536.00
2021-22 618.50
(नोट : आंकड़े एक जून से से 31 मई तक के हैं। औसतन 836.20 एमएम बरसात हर साल होनी चाहिए।)
जनवरी से अब तक बारिश
माह औसत बरसात हुई बरसात ( एमएम)
जनवरी 19.60 35.00
फरवरी 18.00 27.00
मार्च 13.50 00
अप्रैल 05.30 00
मई 14.50 49.25
जून 81.30 00.25
जुलाई 268.50 111
अगस्त 228.7 161.75
सितंबर 148.10 261.75
अक्तूबर 28.20 13.25
डॉक्टर बोले- इस मौसम में सेहत का रखें ज्यादा ध्यान
बारिश की फुहारें तन और मन खुश करने के साथ ही साथ अपने कई तरह की बीमारियां भी लेकर आती हैं। इनकी ओर ध्यान न देने पर बीमार भी हो सकते हैं। फिजिशियन डॉ. सचिन गुप्ता के अनुसार गैस्ट्रोइंटाइटिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस ए और ई, डेंगू, मेलेरिया आदि बीमारी ऐसे मौसम में ज्यादा होती हैं। इसके अलावा एलर्जी, इन्फेक्शन आदि की भी संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि बारिश में भीग जाएं तो भीगे हुए कपड़े जितना जल्दी संभव हो, बदल दें। कूलर और एसी का प्रयोग न करें। खाने-पीने पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही पूरी बाजू वाले कपड़ों को पहना जाए।
बिजली व्यवस्था धड़ाम, आपूर्ति ठप
तेज बारिश के साथ ही बिजली व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। शहर के कोतवाली इलाके में दिन में भी कई बार बिजली आती जाती रही। ऐसे में बारिश की वजह से घरों में कैद लोगों की और भी ज्यादा मुसीबतें बढ़ गई। सिविल लाइंस इलाके में कुछ जगहों पर अंडरग्राउंड केबल में फॉल्ट हुए। कई मोहल्लों की बिजली चार से पांच घंटे तक बाधित रही। कई जगह ट्रिपिंग होती रही।
बिल्सी। सुबह चार बजे को तेज हवा के साथ शुरू हुई बरसात में एक बार फिर से नगर की बिजली गुल हो गई। 10 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति ठप रही। घरों में लगे इन्वर्टर भी फेल हो गए हैं। सबमर्सिबल न चलने से लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ा। संवाद
धान, उड़द और बाजरा की फसल को काफी नुकसान
उझानी। शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे से एक घंटे तक झमाझम बारिश ने धान, उड़द और बाजरा की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। सब्जी फसलों में शिमला मिर्च, तोरई, लौकी आदि को भी नुकसान बताया जा रहा है। संजरपुर निवासी किसान प्रेमपाल सिंह ने बताया कि तीन दिन पहले खेत में सरसों की बुवाई की थी। खेत में पानी भर जाने से सरसों का बीज सड़ जाने की आशंका बनी हुई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार का कहना है कि फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। फिर भी, बारिश अगले दिन होने के साथ तेज हवा चली तो धान और बाजरा को नुकसान ज्यादा होगा। संवाद
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