बेमौसम बरसात ने गेहूं और सरसों उत्पादकों का पसीना छुड़ाना शुरू कर दिया है। शनिवार रात तेज बूंदाबांदी के साथ हवा के तेज झोंकों ने सरसों के मुकाबले गेहूं को ज्यादा नुकसान पहुंचाया। खुदाई को तैयार आलू की फसल भी आंशिक रूप से प्रभावित हुई। एक-दो दिन मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा तो फसलों को ज्यादा नुकसान होगा।
सरसों की फसल को इस बार कोई खास रोग नहीं लगा, लेकिन मौसम ने दो-तीन बार करवट बदली। इससे थोड़ा-बहुत नुकसान जरूर हो गया। सरसों की करीब 70 फीसदी फसल की कटाई का काम भी पूरा हो चुका है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अर्जुन सिंह ने बताया कि बूंदाबांदी तेज हुई तो इसके दाने खेत में बिखर जाएंगे। गेहूं की फसल को बरसात के बजाय तेज हवा की वजह से नुकसान हुआ है। आने वाले कुछ दिन गेहूं की फसल पर भारी पड़ सकते हैं। तेज बरसात की स्थिति में आलू की फसल सड़ने की आशंका बढ़ जाएगी। डॉ. सिंह का कहना है कि बरसात ज्यादा होने पर आलू उत्पादक खेतों में पानी न भरने दें। खेतों से बरसाती पानी का निकास कर दिया जाए तो आलू प्रभावित नहीं होगा। बता दें कि इस बार मौसम खासकर गेहूं की फसल के लिहाज से अनुकूल नहीं रहा है। बुवाई के बाद जब कल्ले फूटने का वक्त था, तब तापमान अचानक ही बढ़ गया। पकने के दिन आए तो बूंदाबांदी के साथ तेज हवा ने नुकसान पहुंचाने का काम किया।
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गेहूं की सिंचाई से बचें काश्तकार
उझानी। मौसम ठीक होने तक खासकर गेहूं उत्पादकों को फसल में सिचाई से बचना होगा। चूंकि तेज हवा चलने की आशंका बरकरार है, ऐसे में किसान अगर फसल की सिंचाई कर देंगे तो गेहूं जमीन पर गिर सकता है। गेहूं गिरने की स्थिति में पैदावार भी प्रभावित होगी।