लोकसभा टिकट वितरण में मुसलमानों को हिस्सेदारी न मिलने से नाराज
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। टिकट की आस टूटने पर समाजवादी पार्टी में उथल-पुथल मची हुई है। सलीम शेरवानी और योगेंद्र तोमर के बाद अब वक्फ विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व विधायक आबिद रजा ने मंगलवार को पार्टी के राष्ट्रीय सचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
बदायूं लोकसभा सीट से पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से ही सपा में खींचतान शुरू हो गई थी। इसी दौरान राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भी सपा के प्रत्याशी घोषित कर दिए। पांच बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सलीम शेरवानी को दरकिनार कर दिया गया। इसके बाद नाराज शेरवानी ने राष्ट्रीय महासचिव पद छोड़ दिया। आबिद रजा ने भी शेरवानी को राज्यसभा प्रत्याशी न बनाए जाने पर आबिद ने उसी दिन बागी तेवर अपना लिए थे। इसके बाद यादव मुस्लिम गठजोड़ बनाए रखने के लिए बदायूं लोकसभा सीट से धर्मेंद्र यादव का टिकट काटकर शिवपाल सिंह यादव को प्रत्याशी बना दिया गया। आंवला लोकसभा सीट पर आबिद रजा और सलीम शेरवानी दोनों की नजर थी। यहां से भी सपा ने नीरज मौर्य को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
मंगलवार को आबिद रजा ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली में प्रेस वार्ता की। उन्होंने सपा पर मुस्लिमों की उपेक्षा का आरोप लगाया। सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह गठबंधन सिर्फ मुसलमानों को रोकने के लिए किया गया है। मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहा है। वह सपा को वोट दे रहा है, लेकिन उसे राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। उन्होंने टिकट बंटवारे और वोट बैंक को सहेज कर रखने को लेकर सपा नेतृत्व पर भी सवाल उठाए हैं। आबिद ने अपना इस्तीफा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजा है।