बदायूं। जिलेभर में शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी के मौके पर गन्ने का मंडप सजाकर भगवान सालिग्राम और तुलसी का विवाह कराया गया। वहीं, शुक्रवार को सहालग की भी शुरुआत हो गई। हालांकि अब विवाह के योग 25 नवंबर से बनेंगे। इसके लिए मैरिज हॉल से लेकर कैटरर्स तक शादियों के लिए पहले से बुक हो चुके हैं। जिन घरों में शादियां होने को है, वहां खरीदारी का दौर चल रहा है।
मान्यता है कि तुलसी विवाह से ही देवी-देवता जागते हैं और बेटी स्वरूपा मानकर तुलसी का विवाह कराया जाता है। तुलसी विवाह करते हुए सुख-समृद्धि की मनौती मानी जाती है। इस दिन से शादियों का दौर शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार शुक्र डूबने की वजह से शुक्रवार के बाद 24 नवंबर तक शादी का कोई भी शुभमुहुर्त नहीं है। बाजार में दुकानों पर रौनक देखने को मिल रही है।
हो चुकी मैरिज लॉन और कैटरर्स की बुकिंग
इस बार शुक्र डूबने की वजह से शादी का सहालग आगे बढ़ गया है। ऐसे में करीब 20 दिनों तक शादी का शुभ मुहूर्त नहीं है। इसकी वजह से मैरिज हॉल खाली चल रहे है। हालांकि 25 नवंबर के बाद में लगातार 14 जनवरी तक सहालग है। मैरिज लॉन के मैनेजर सोनू आदित्य ने बताया कि शुक्रवार को उनके यहां शादी हुई है। अब शादियां 25 से हैं। लोगों ने पहले से ही बुकिंग करा रखी है। कैटरर्स श्याम मोहन ने बताया कि अभी 20 दिन तक शादी का सीजन नहीं है, लेकिन उसके बाद में लगातार शादी है।
ऐसे में शादियों के लिए बुकिंग हो गई। सात, आठ और नौ दिसंबर को बड़ा सहालग है। ऐसे मेें कर्मचारी तलाशने पर भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में कुछ पार्टी के लिए तो मना करना पड़ा है। लाइटिंग करने वाले जगत सिंह ने बताया कि सहालग के सीजन में सभी दिन बुक है। कई लोग जान पहचान के अभी भी आ रहे है। मजबूरी में उन्हें मना करना पड़ रहा है।
यह है शादी के शुभ मुहूर्त
पंडित गिरीश ने बताया कि 30 सितंबर को शुक्र अस्त हो गए थे। यहां से विवाह पर विराम लग गया था। अब शुक्रवार के बाद यह 25 नवंबर को उदय होंगे। तब से विवाह योग की स्थिति बनेगी। इसमें भी शुभ विवाह योग दो दिसंबर से शुरू होंगे, जो 14 दिसंबर तक ही चलेंगे, क्योंकि 16 दिसंबर से एक माह तक खरमास (धनु संक्रांति) लग जाएगी। इसमें भी विवाह नहीं होंगे। ऐसे में 14 जनवरी के बाद में विवाह शुरू होंगे।
मेला ककोड़ा में देवोत्थान एकादशी पर पूजन करता एक परिवार। संवाद- फोटो : BADAUN