कादरचौक के ब्लॉक संसाधन केंद्र असरासी पर प्रशिक्षण शुरू
इस मौके पर शुक्ल ने कहा पॉलीथिन के प्रयोग से जल, थल तथा वायु तीनों ही तरह के प्रदूषण होते हैं। इसको जलाने से विषैली गैस निकलती हैं, जो ओजोन परत के क्षय का प्रमुख कारण है। भूमि में दबाने पर इसके गलने में बहुत वर्ष लगते हैं। इसी प्रकार अवशिष्ट पदार्थों के रूप में यह नालियों को बंद कर देती है, जिसके कारण पानी प्रदूषित होने का भी खतरा रहता है। सह समन्वयक कृष्णपाल शाक्य ने कहा कि इसके प्रयोग के गंभीर परिणाम आने पर उत्तर प्रदेश में इस पर प्रतिबंध कल 21 जनवरी से लग चुका है, लेकिन अभी भी लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी है। सह समन्वयक डा. जुगल किशोर ने कहा कि अभी हाल ही में हुए शोध से यह सामने आया है कि खाद्य पदार्थों की पैंकिंग में पॉलीथीन के बढ़ते प्रयोग से कई प्रकार की बीमारियां जन्म ले रही हैं। गर्म खाद्य पदार्थों को पॉलीथिन में कभी पैक ना करवाएं। शपथ ग्रहण के अवसर पर प्रशिक्षक सुधा मिश्रा, विवेक द्विवेदी, अमिता शर्मा, सह समन्वयक बृजेश यादव व प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।