शायरों ने कलाम पेश करके समा बांधा, बाद में हुआ लंगर
संवाद न्यूज एजेंसी
वजीरगंज। हजरत सूफी सिब्ते अहमद साहब के तीन रोज़ा उर्स का क़ुरआन ख्वानी, महफिल-ए-मिलाद और कुल शरीफ की फातेहा से समापन हुआ। कार्यक्रम में कई लोगों ने कलाम पेश किए। महफ़िल की निजामत शायर हिलाल बदायूंनी ने की।
जलसे में मौलाना मुफ़्ती सय्यद वाकिफ अली ने कहा कि वली अल्लाह का दोस्त होता है और अवाम को भी अल्लाह की दोस्ती दिला देता है। मुफ्ती वसीम अशरफ ने कहा कि सूफी जी का हाथ हजरत वली के हाथ में है और हजरत वली का हाथ हजरत अली के हाथ में है। कारी गुलाम यासीन ने कहा कि जिन्होंने अल्लाह के रास्ते पर अपनी जिंदगी गुज़ारी है, उनके साथ हो जाओ। जो अल्लाह का खौफ रखते हैं वे ही अल्लाह से डरते हैं और वे ही ईमान वाले हैं। शायर इंतिखाब संभली, अनवर कादरी, सगीर बदायूंनी, हिलाल बदायूंनी ने कलाम पेश किए।
इससे पहले कुल की महफ़िल में सूफी जी की मज़ार पर नगर से होते हुए चादरों का जुलूस पहुंचा। दोपहर एक बजे से महफिल-ए-मिलाद में तक़रीर हुईं। इसके बाद सलाम पेश किया गया। महफ़िल में हाफ़िज़ इरशाद , हाफ़िज़ जीशान जौक, हाफिज अबरार अहमद, नन्ने बाबू, सरफ़राज़, सलीम, गयूर अली, मुशफ़िक़, अहकम आदि मौजूद रहे। तबर्रुकात के बाद लंगर तकसीम किया गया।