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Budaun News: बारिश में हजारों क्विंटल मक्का भीगी, गुणवत्ता होगी प्रभावित

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उझानी में बारिश से मक्का बचाने का डाली गई पॉली​थिन। संवाद
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उझानी। जून में पहली बार हुई झमाझम बारिश ने मक्का उत्पादकों को परेशानी में डाल दिया। गहाई के बाद किसानों ने सुखाने के लिए मक्का जहां भी फैलाई थी, बारिश आने पर उसे समेटना मुश्किल हो गया। कुछेक लोगों ने पॉलिथीन का इस्तेमाल कर उसे भीगने से बचा लिया, लेकिन अधिकतर इलाकों में मक्का भीग गई। इसका दानों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
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जिले में बारिश शनिवार को भी हुई थी, लेकिन यहां अधिकतर इलाका इससे अछूता रहा था। रविवार सुबह मामूली बूंदाबांदी होने पर किसानों ने मक्का सुखाने के लिए इंतजार भी किया। पूर्वाह्न चटक धूप निकलने पर किसानों को जहां भी मौका मिला, सुखाने के लिए उसे फैला दिया। इसके बाद दो बजे अचानक ही झमाझम बारिश होने लगी। जिन किसानों के पास पॉलिथीन या फिर त्रिपाल उपलब्ध थे, उनका इस्तेमाल कर उन्होंने मक्का को भीगने से बचा लिया, लेकिन संसाधनों के अभाव में अधिकतर इलाकों में मक्का भीग गई।
अहीरवारा निवासी किसान भूरे यादव ने बताया कि बारिश एक-दो दिन और हुई तो सूखने के अभाव में दाने दागदार हो जाएंगे। वहीं पकी खड़ी फसल को भी नुकशान होगा। भुंटे में दाने सड़ भी सकते हैं। बारिश के बाद मक्का की गहाई पर भी ब्रेक लग गया है। गुणवत्ता चपेट में आ जाने से बाजार भाव भी पहले जैसा नहीं मिलेगा।
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आढ़ती अमर सिंह के मुताबिक- दागदार मक्का का भाव प्रति क्विंटल करीब दो सौ रुपये कम भी रह सकता है। अच्छी गुणवत्ता की मक्का का भाव फिलहाल 2265 रुपये प्रति क्विंटल है।

उझानी से लोड हो चुकी है मक्का की चार रैक
कृषि उत्पादन मंडी समिति में मक्का की आवक में निरंतर इजाफा होने से आढ़तियों के एक ग्रुप के जरिये मालगोदाम से रैक लोड कर भेजने का सिलसिला भी शुरू किया जा चुका है। रेलवे के वरिष्ठ वाणिज्य अधीक्षक केपी सिंह बताया कि उझानी से आठ दिन के दौरान चार रैक लोड कराके भेजी जा चुकीं हैंं। तीन रैक मध्यप्रदेश के नीमच और उत्तराखंड के ऊधमसिंहनगर को एक रैक गई है। आने वाले दिनों में सात-आठ रैक और लोड होने की संभावना है।

धान की पौध को मिली संजीवनी
बारिश से एक ओर जहां अगेती हाइब्रिड मक्का को नुकसान होने का अंदेशा है, वहीं दूसरी ओर धान उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक- धान की पौध करीब 20 दिन में तैयार हो जाती है। कुछेक इलाकों में पौध डाली जा चुकी है। अधिकतर किसान बारिश होने के इंतजार में थे। पहले से खेत तैयार कर चुके किसान एक-दो दिन में बासमती, रेशम, सरबती समेत अन्य प्रजाति के धान की पौध लगा सकते हैं। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान रोपाई का भी अच्छा समय मिलेगा।
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