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ये मौसम और लापरवाही... गले न पड़ जाए बीमारी

सार

अक्तूबर में हो रही बेमौसम बारिश सेहत के लिए नुकसानदायक है।अस्थमा के रोगियों को इस मौसम में ज्यादा परेशानी हो सकती है।कोरोना के कारण लंग फाइब्रोसिस हो जाती है जिससे फेफड़े जगह-जगह प्लास्टिक की तरह हो जाते हैं और उनकी कार्यक्षमता घटने लगती है।
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विस्तार
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बदायूं। अक्तूबर में हो रही बेमौसम बारिश सेहत के लिए नुकसानदायक है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में जरा सी असावधानी बरतने पर साधारण सर्दी जुकाम से लेकर वायरल, दर्द समेत त्वचा से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। खासकर फेफड़ों से जुड़े रोगियों को तो इसमें विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी जाती है।
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मौसम के बदलाव में वैसे ही अक्सर मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टर भी सामान्य से ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह लोगों को दे रहे हैं। इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी सांस संबंधी मरीजों के सामने आ रही है। इसके अलावा हाइपरटेंशन, निमोनिया, और सर्दी जुकाम के मरीज भी डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। त्वचा संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या भी कुछ बढ़ी है।
नमी में होता है प्रदूषण, फेफड़ों में चिपक जाती है गंदगी
ऐसे मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। नमी के कारण अदृश्य हानिकारक धूल और धुएं के कण हवा में घुल जाते हैं। सांस के साथ ये कण फेफड़ों तक पहुंचते हैं और सांस में परेशानी पैदा करते हैं। अस्थमा के रोगियों को इस मौसम में ज्यादा परेशानी हो सकती है। चूंकि बारिश में लोगों के शारीरिक क्रियाकलाप भी कम हो जाते है, इसलिए ब्लड सर्कुलेशन कम होने लगता है और हार्ट संबंधी दिक्कत होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
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कोरोना के मरीजों को ज्यादा सावधानी की जरूरत।
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुरेश चंद्र नौगरिया का कहना है कि इस मौसम में सर्दी जुकाम और निमोनिया के साथ हार्ट और फेफड़ों के रोग ज्यादा होते हैं। जिन लोगों को कोरोना हो चुका है, उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता वैसे ही घट चुकी है। कोरोना के कारण लंग फाइब्रोसिस हो जाती है जिससे फेफड़े जगह-जगह प्लास्टिक की तरह हो जाते हैं और उनकी कार्यक्षमता घटने लगती है। ऐसे में इस मौसम में इस प्रकार के मरीजों को ज्यादा लोड नहीं लेना चाहिए। मास्क का प्रयोग न छोड़ें, इससे सांस के साथ जाने वाले प्रदूषण की मात्रा कम होगी। धूल और धुएं से बचाव ज्यादा जरूरी है।
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ये रखें सावधानी
- जितना हो सके भीगने से बचें और बाहर जरूरत होने पर ही निकलें।
- बाहर के खाने से बचें और घर में भी गर्म खाना खाएं।
- कोरोना और सांस संबंधी मरीज जरूरत पड़ने पर नेबुलाइजर का इस्तेमाल करें।
- कोराना जा चुका है, केवल ये सोचकर मास्क लगाना न भूलें।
- जितनी क्षमता हो उतना ही काम करें। ज्यादा लोड लेने पर फेफड़ों और दिल पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
- हल्का व्यायाम नियमित रूप से करें। यदि कोरोना हो चुका है तो ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
- रेस्पायरोमीटर से एक्सरसाइज करें। इससे फेफड़ों के फैलाव में मदद मिलती हैं।
(वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुरेश चंद्र नौगरिया के अनुसार)
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