ग्राम उरैना में चारपाई पर बैठा गोविंद का परिवार। संवाद
- फोटो : BADAUN
वजीरगंज। पांच वर्ष पूर्व ग्राम उरैना में हुए दोहरे हत्याकांड में मृतक गोविंद के पिता पप्पू चारों मुजरिमों को फांसी की सजा होने से बेहद खुश है। उसने न सिर्फ न्यायपालिका पर, बल्कि ऊपर वाले के न्याय पर भी भरोसा जताया है। हालांकि जवान बेटे को खोने का दुख आज भी परिजनों के चेहरे पर साफ दिखाई देता है।
14 मई, 2017 को ग्राम उरैना में 25 वर्षीय गोविंद पुत्र पप्पू तथा 22 वर्षीय आशा पुत्री किशनलाल की कुल्हाड़ी तथा गंड़ासे से काटकर नृशंस हत्या कर दी गई थी। बृहस्पतिवार को इस मामले में चारों आरोपियों को जिला जज द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई। इसकी जानकारी होने पर पप्पू तथा उसके परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली। अपने बेटे के हत्यारोपियों को फांसी की सजा होने पर उन्होंने इसे सच्चाई की जीत बताते हुए कहा कि इन पांच सालों में मुकदमे की पैरवी करके उन्होंने जो थोड़ी बहुत जमा पूंजी थी वो भी खर्च कर दी। यहां तक कि लोगों से उधार भी लेना पड़ा।
पप्पू मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है। उसके पास पक्का मकान तक नही है। झोंपड़ी पर पन्नी डालकर पूरा परिवार गुजर बसर करता है। परिवार में पत्नी चंपा के अलावा तीन बेटियां तथा एक बेटा है। एक बेटी की शादी हो चुकी है। कमाने वाला वह अकेला है, फिर भी उसने किसी तरह अपना पेट काटकर बेटे के मुजरिमों को सजा दिलाई।