बदायूं। जिला अस्पताल में विशेषज्ञ न होने से गंभीर रोगियों के लिए चिकित्सा सेवाएं वेंटिलेटर पर रहीं हैं। रोगियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सर्जन, फिजीशियन, डेंटल सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, त्वचा रोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए कई बार शासन को लिखा जा चुका है, लेकिन कमी पूरी नहीं हो सकी है।
जिला अस्पताल में 300 रोगियों को भर्ती करने की व्यवस्था है। इसके साथ ही ओपीडी में औसतन रोज 1200 रोगी आते हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 29 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इसके सापेक्ष तैनाती 10 पदों पर ही है। डॉक्टरों के 19 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। जिला अस्पताल में लेवल दो के नौ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इनमें दो पर ही तैनाती है। लेवल तीन पर 10 के सापेक्ष नौ पदों में सिर्फ एक पद और लेवल चार के नौ पदों में सात पद की तैनाती है।
सीएमओ और सीएमएस स्तर से डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए विभाग को 14 बार पत्राचार किया गया लेकिन डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी। दिन पर दिन स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रही हैं। डॉक्टरों की भर्ती के लिए सीएमओ कार्यलय में तीन बार साक्षात्कार भी हुआ लेकिन जिले के लिए एक भी डॉक्टर नहीं मिल सका। डॉक्टरों की कमी पुरी हो तब कहीं जाकर व्यवस्थओं में सुधार आए। डॉक्टरों की कमी के चलते कभी-कभी मरीजो को ओपीडी से बिना दवा के ही लौटना पड़ जाता है।
बोले रोगी
ओपीडी में डॉक्टर हैं ही नहीं, रोगियों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। अस्पताल आने का कोई लाभ नहीं हुआ। जब डॉक्टर ही नहीं मिले तो दवाओं का क्या। -नाजिमी
डॉक्टर तो मिल गए लेकिन दो घंटे तक लाइन में खड़े रहने के बाद, मुझे पर्चे पर मेडिकल स्टोर की दवा लिखी गई। डॉक्टर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।-गुड्डू
डॉक्टरों और विशेषज्ञों के पद रिक्त होने संबंधी सूचना और इन पर तैनाती के लिए समय-समय पर शासन को लिखा जा रहा है। उच्चाधिकारियों को भी लगातार अवगत कराया जा रहा है। जितने डॉक्टर है उनसे ही बेहतर काम कराने की कोशिश की जा रही है। मरीजों को कोई दिक्त न हो इसके लिए प्रयास लगातार प्रयास जारी है। रोगियों को किसी तरह की समस्या न हो इसका पूरा ध्यान रखा जा रहा है। डॉ. कप्तान सिंह , सीएमएस जिला अस्पताल