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Honor Killing Verdict: नृशंस हत्या के बाद खाली हो गया था गांव, घरों में ताले डालकर भाग गए थे पड़ोसी

Fri, 23 Sep 2022 12:52 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बदायूं

सार

14 मई, 2017 को उरैना गांव में ऐसा दोहरा हत्याकांड हुआ था कि गांव के अधिकतर लोग अपने घर छोड़कर भाग गए थे।इसके बारे में गांव के सभी लोगों को जानकारी थी, लेकिन किशनलाल इसके लिए तैयार नहीं था।इसी दौरान गोविंद और आशा की हत्या कर दी गई।
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सजा सुनाए के बाद न्यायालय के बाहर खड़े मुजरिम। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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बदायूं में 14 मई, 2017 को उरैना गांव में ऐसा दोहरा हत्याकांड हुआ था कि गांव के अधिकतर लोग अपने घर छोड़कर भाग गए थे। उनके पड़ोसी अपने मकानों में ताला लगाकर लापता हो गए थे। दो घंटे बाद जब पुलिस पहुंची, तब कहीं गांव की महिलाएं सामने आईं और पुलिस को जानकारी दी।
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वजीरगंज थाना क्षेत्र के गांव उरैना निवासी 25 वर्षीय गोविंद दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता था। उसका अपनी ही जाति की 22 वर्षीय आशा पुत्री किशनलाल से प्रेमप्रसंग चल रहा था। दोनों कई बार गांव छोड़कर भाग चुके थे। इसके बारे में गांव के सभी लोगों को जानकारी थी, लेकिन किशनलाल इसके लिए तैयार नहीं था।

गोविंद और आशा एक-दूसरे से शादी करने को अड़े थे। जब वह नहीं माने तो किशनलाल ने शादी की हां कर दी, लेकिन वह दोनों नहीं जानते थे कि यह किशनलाल का षड्यंत्र है। किशनलाल ने गांव में एलान कर दिया था कि वह गोविंद और आशा की शादी कर रहा है। इससे गोविंद का परिवार निश्चिंत हो गया।
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वे शादी की तैयारियों में जुट गए। शादी से सात दिन पहले किशनलाल ने तैयारियों की बात करने को लेकर गोविंद को बुलाया था। इसी दौरान गोविंद और आशा की हत्या कर दी गई। मुजरिम दोनों शवों को ठिकाने लगाने की तैयारी कर रहे थे कि ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया। इससे वे गोविंद का शव गली में डालकर भाग गए, जबकि आशा का शव घर में दबा दिया गया था।

हत्या से पहले गोविंद को कराया था चाय-नाश्ता
जिस वक्त गोविंद को घर पर बुलाया गया था। उस समय आशा घर में मौजूद थी। उसे नहीं पता था कि उसका पिता और सौतेले भाई उनकी हत्या कर देंगे। जब गोविंद घर पर पहुंचा तो उसके लिए चाय बनवाई गई। उसे बिस्कुट भी खाने को दिए थे। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो मेज पर चाय और बिस्कुट रखे मिले।

पंचायत में हुआ था दोनों की शादी कराने का फैसला
गोविंद और आशा की शादी कराने का फैसला गांव की पंचायत में हुआ था। ग्रामीणों ने कहा था कि इसका हल यही है कि इनकी शादी करा दी जाए। इसके लिए गोविंद का फूफा उसे बाइक पर बैठाकर गांव ले गया। तमाम ग्रामीणों के सामने किशनलाल ने शादी करने की हामी भरी।

किशनलाल बोला- परेशान मत हो जल्दी छूटकर आ जाऊंगा
फांसी की सजा सुनाए जाने के बावजूद किशनलाल, उसकी पत्नी जलधारा और किशनलाल के सौतेले बेटों को कोई मलाल नहीं था। सजा सुनाये जाने के दौरान तमाम रिश्तेदार मौजूद थे। किशनलाल का भांजा सजा सुनकर रो पड़ा पर, किशनलाल उससे कह रहा था कि परेशान मत हो, वह जल्दी छूटकर आ जाएगा।

 

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