बदायूं। भ्रष्टाचार को लेकर जिले की तस्वीर प्रदेश में खराब हो रही है। एंटी करप्शन की टीम छह माह में सात सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत लेते पकड़ चुकी है। पकड़े गए लोगों में महिला इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। इससे समझा जा सकता है कि जिले में पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का क्या हाल है।
एंटी करप्शन की टीम ने इस्लामनगर थाने में 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते महिला इंस्पेक्टर सिमरनजीत कौर को 28 मई को गिरफ्तार किया था। उन पर दुष्कर्म पीड़िता के खिलाफ दर्ज आईटी एक्ट के मुकदमे की विवेचना के नाम पर रिश्वत लेने का आरोप था। इसके अलावा कादरचौक थाने के अंदर 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हेड कांस्टेबल प्रवेंद्र कुमार को एंटी करप्शन की टीम ने 21 जून को गिरफ्तार किया था। हेड कांस्टेबल प्रवेंद्र कुमार और दरोगा महेश कुमार छेड़खानी व मारपीट के मामले को खत्म कराने के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।
11 जुलाई को चौकी इंचार्ज दानपुर धर्मवीर सिंह को एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों पकड़ा। उन पर शिकायती पत्र के आरोपी को धमराने को आरोप था। उन्होंने 20 हजार रुपये में मामला निपटाने को कहा था, लेकिन बाद में बात 10 हजार रुपये में तय हो गई। पीड़ित मनोज कुमार ने एंटी करप्शन टीम को सूचना दे दी। 11 जुलाई बृहस्पतिवार दोपहर चौकी इंचार्ज रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिए गए।
तहसील से लेकर पालिका तक में भी रिश्वती बाबू
-एंटी करप्शन की टीम ने दातागंज तहसीलदार के पेशकार राजीव शर्मा को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते 26 जून काे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। उन पर वसीयत दर्ज कराने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगने का आरोप केशवपुर के शिक्षक नंदकिशोर ने लगाया था। इसके अलावा जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां के बाबू संदीप कुमार भारती ऑडिट करने के नाम पर रिश्वत की मांग कर रहा था। दस सितंबर मंगलवार को आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन की टीम ने उनको इंद्रा चौक के पास से गिरफ्तार किया था। शहर में में मीट की दुकान का लाइसेंस बनाने के नाम पर आठ हजार रुपये की रिश्वत लेते नगर पालिका के बाबू मुशाहिद अली को हाल ही में 23 सितंबर एंटी करप्शन टीम ने रंगेहाथ पकड़ा।